सरकारी भूमि को निजी बताकर भाजपा विधायक ने खरीदा:महाकाल मंदिर की पार्किंग की जमीन है; लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू और हाईकोर्ट तक पहुंची शिकायत




उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास पार्किंग के लिए उपयोग हो रही जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन को निजी दिखाया गया और फिर उसका सौदा कर दिया गया। इस जमीन पर फाइव स्टार होटल बनाने की तैयारी भी बताई जा रही है। मामले में लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और हाईकोर्ट तक शिकायत पहुंची है। 45 हजार वर्गफीट जमीन 3.82 करोड़ में बेची गई
मामला करीब 45 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा है। यह जमीन 2 मार्च 2026 को यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने 3.82 करोड़ रुपए में खरीदी। कंपनी के डायरेक्टर और साझेदारों में आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी शामिल बताए जा रहे हैं। शिकायत के अनुसार जिन खसरों की जमीन इस सौदे में शामिल है, उनका कुछ हिस्सा वर्तमान में महाकाल मंदिर पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि पहले यह भूमि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी और बाद में इसे निजी खातों में दर्ज कर दिया गया। उज्जैन के रहने वाले कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुवाल ने इस मामले में मुख्य सचिव, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू से लिखित शिकायत की है। साथ ही इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर कर जांच की मांग की गई है। राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी भूमि दर्ज होने का दावा
शिकायत में कहा गया है कि खसरा नंबर 3664/1 और 3666/1 वर्ष 1950 और 1967-68 के राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थे। आरोप है कि बाद में मिलीभगत कर इन जमीनों को निजी भूमि में बदल दिया गया। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री में गड़बड़ी का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप है कि जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री की गई, जबकि यह कमर्शियल उपयोग की जमीन है। कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार कीमत 75,400 रुपए प्रति वर्गमीटर बताई गई है, लेकिन रजिस्ट्री में इसे 22,500 रुपए प्रति वर्गमीटर दिखाया गया। सरकार को 3.40 करोड़ नुकसान का दावा
दस्तावेजों के आधार पर शिकायत में कहा गया है कि 4180 वर्गमीटर जमीन की वास्तविक कीमत 31.51 करोड़ रुपए बैठती है। इसके अनुसार करीब 2.99 करोड़ रुपए स्टांप शुल्क और 94.55 लाख रुपए पंजीयन शुल्क बनता था। लेकिन केवल 40.36 लाख रुपए स्टांप और 12.90 लाख रुपए पंजीयन शुल्क जमा कराया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जमीन पर पहले से मैरिज गार्डन और अन्य निर्माण मौजूद थे, लेकिन इन्हें छिपाकर केवल टिन शेड दर्शाया गया, जिससे टैक्स कम लगे। नगर निगम की पार्किंग बताई गई जमीन
महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि हरिफाटक और कल्प क्षेत्र में पार्किंग नगर निगम के अधीन है। जमीन के उपयोग की विस्तृत जानकारी नगर निगम से ली जा सकती है। विधायक ने आरोपों को बताया झूठा
भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने कहा कि रजिस्ट्री दस्तावेजों के आधार पर की गई है और सभी स्टांप एवं पंजीयन शुल्क नियम अनुसार जमा किए गए हैं। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह झूठा और द्वेषपूर्ण बताया। अब पुलिस और प्रशासन स्तर पर मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है।



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