गरीब रथ और जन शताब्दी समेत 10 जोड़ी ट्रेनों का दर्जा बदला, अब सुपरफास्ट नहीं कहलाएंगी

नई दिल्ली
 एक जमाना था जबकि रेल मंत्रालय सामान्य मेल और एक्सप्रेस गाड़ियों की स्पीड बढ़ा कर उसे 'सुपरफास्ट' का दर्जा देता था। इन ट्रेनों में यात्रियों की यात्रा जल्दी पूरी होती है और रेलवे की अतिरिक्त कमाई होती है। लेकिन, अब यह जमाना आ गया है कि थोक में सुपरफास्ट गाड़ियों का यह दर्जा खत्म कर उसे सामान्य मेल/एक्सप्रेस ट्रेन बनाया जा रहा है। रेलवे के एक ताजा फैसले में कम से कम 10 जोड़ी ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म किया जा रहा है। इनमें गरीब रथ एक्सप्रेस , जन शताब्दी एक्सप्रेस और कुछ अन्य लोकप्रिय ट्रेनों के नाम शामिल हैं। यह फैसला एक जनवरी 2027 या इसके बाद लागू हो रहा है।

यह गरीब रथ अब सुपरफास्ट नहीं
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साउथ वेस्टर्न रेलवे के बेंगलुरु डिवीजन ने एक महत्वूर्ण फैसला किया है। तय हुआ है कि यशवंतपुर से त्रिवेंद्रम नॉर्थ के बीच चलने वाली गरीब रथ एक्सप्रेस अब सुपरफास्ट नहीं रहेगी। यह सामान्य एक्सप्रेस ट्रेन की तरह चलेगी। क्योंकि इसकी एवरेज स्पीड घटायी जा रही है। अब इसका नंबर 12257/58 के बदले 16537/38 हो जाएगा। यह फैसला एक जनवरी 2027 के बाद लागू हो जाएगा। इस ट्रेन का नंबर और दर्जा भले ही बदल जाए, लेकिन इसका नाम गरीब रथ एक्सप्रेस ही रहेगा।

इस जन शताब्दी का छिना सुपरफास्ट दर्जा
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से हिंगोली डेक्कन के बीच चलने वाली जन शताब्दी एक्सप्रेस का सुपरफास्ट दर्जा भी खत्म किया जा रहा है। अब यह ट्रेन सामान्य मेल/एक्सप्रेस ट्रेन की तरह चलेगी। इसका ट्रेन का पुराना नंबर 12071/72 नहीं रहेगा बल्कि नए नंबर 11069/70 से चलेगी। इस ट्रेन की भी एवरेज स्पीड घटायी जा रही है।

महानगरी समेत अन्य ट्रेन अब सुपरफास्ट नहीं
मुंबई इलाके से चलने वाली आठ अन्य लोकप्रिय ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म कर दिया गया है। इनमें मुंबई से वाराणसी के बीच चलने वाली महानगरी एक्सप्रेस समेत दो ट्रेनें, अयोध्या कैंट से मुंबई के बीच चलने वाली तुलसी एक्सप्रेस आदि शामिल हैं। नीचे टेबल में देखिए इन सभी ट्रेनों की पूरी सूची।

18 ट्रेनों से हटा सुपरफास्ट ट्रेन का दर्जा

मुंबई CSMT – हिंगोली डेक्कन जन शताब्दी- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 12071/12072 है, जो 1 जनवरी 2027 से बदलकर 11069/11070 हो जाएगा. यह ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और हिंगोली के बीच चलती है। 

CSMT – पुणे प्रगति एक्सप्रेस- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 12125/12126 है, जो बदलकर 11435/11436 हो जाएगा. यह ट्रेन मुंबई CSMT और पुणे के बीच चलती है। 

मुंबई LTT – तिरुवनंतपुरम नॉर्थ (कोचुवेली)- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 22113/22114 है, जो बदलकर 11073/11074 हो जाएगा. यह ट्रेन लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) और तिरुवनंतपुरम के बीच चलती है। 

मुंबई LTT – करमाली एसी एक्सप्रेस- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 22115/22116 है, जो बदलकर 11053/11054 हो जाएगा. यह ट्रेन लोकमान्य तिलक टर्मिनस और गोवा के करमाली के बीच चलती है। 

CSMT – बनारस महानगरी एक्सप्रेस- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 22177/22178 है, जो बदलकर 11093/11094 हो जाएगा. यह ट्रेन मुंबई CSMT और बनारस के बीच चलती है। 

LTT – अयोध्या कैंट तुलसी एक्सप्रेस- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 22129/22130 है, जो बदलकर 11065/11066 हो जाएगा. यह ट्रेन लोकमान्य तिलक टर्मिनस और अयोध्या कैंट के बीच चलती है। 

CSMT – चेन्नई एग्मोर एक्सप्रेस- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 22157/22158 है, जो बदलकर 11063/11064 हो जाएगा. यह ट्रेन मुंबई CSMT और चेन्नई एग्मोर के बीच चलती है। 

मुंबई LTT – बनारस एक्सप्रेस- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 12167/12168 है, जो बदलकर 11067/11068 हो जाएगा. यह ट्रेन लोकमान्य तिलक टर्मिनस और बनारस के बीच चलती है। 

पुणे – काजीपेट एक्सप्रेस- इस ट्रेन का मौजूदा नंबर 22151/22152 है, जो बदलकर 11437/11438 हो जाएगा. यह ट्रेन पुणे और काजीपेट के बीच चलती है। 

क्यों हटाया गया सुपरफास्ट का दर्जा
भारतीय रेलवे बोर्ड के नियमों के मुताबिक, किसी भी ट्रेन को सुपरफास्ट की श्रेणी में बनाए रखने के लिए उसकी पूरे सफर की एवरेज स्पीड अप और डाउन दोनों ओर से कम से कम 55 किलोमीटर प्रति घंटा (55 KMPH) या उससे ज्यादा होना जरूरी होता है. मध्य रेलवे की ओर से की गई समीक्षा में पाया गया कि इन 9 जोड़ी ट्रेनों की पूरे रूट पर औसत रफ्तार 55 किमी/घंटा की निर्धारित सीमा से कम है. गति के तय मानकों को पूरा न करने के कारण रेलवे ने इनका सुपरफास्ट दर्जा खत्म करने का फैसला किया। 

रेलवे स्टेशनों को दिया गया है निर्देश
मध्य रेलवे ने सभी संबंधित रेलवे स्टेशनों पर एनाउंसमेंट सिस्टम और सूचना बोर्डों के जरिए यात्रियों को ट्रेन के नए नंबरों की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं. जारी सूचना के अनुसार, केवल ट्रेनों का दर्जा और नंबर बदले गए हैं. फिलहाल इनके वर्तमान समय और किराये में किसी बड़े बदलाव का जिक्र नहीं किया गया है। 

रेलवे ने 1 जनवरी 2027 या उसके बाद यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे आईआरसीटीसी (IRCTC) या रेलवे पूछताछ पर संशोधित ट्रेन नंबरों का इस्तेमाल करके ही अपनी टिकट बुकिंग कराएं। 

सुपरफास्ट ट्रेन बोले तो…
रेलवे के नियमों के अनुसार उन ट्रेनों को सुपरफास्ट का दर्जा दिया जाता है जिनकी एवरेज स्पीड 55 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे ज्यादा होती है। इन ट्रेनों के कम स्टॉपेज होते हैं और ट्रेफिक डिपार्टमेंट अन्य ट्रेनों की तुलना में इसे तवज्जो देता है। हां इसका किराया थोड़ा ज्यादा होता है क्योंकि इन ट्रेनों के टिकट के साथ सुपरफास्ट सरचार्ज भी वसूला जाता है।

सुपर सरचार्ज कितना देना होता है
रेलवे के नियमों के मुताबिक सुपरफास्ट दर्जे वाली ट्रेन के हर क्लास में यात्रियों को सुपरफास्ट सरचार्ज का भुगतान करना होता है। विभिन्न श्रेणी में सुपर सरचार्ज निम्न तरीके से वसूला जाता है:-

    फर्स्ट एसी- 75 रुपये प्रति यात्री
    सेकेंड एसी/थ्री एसी/एसी 3 इकोनॉमी- 45 रुपये प्रति यात्री
    स्लीपर क्लास- 30 रुपये प्रति यात्री
    सेकेंड या जनरल क्लास- 15 रुपये प्रति यात्री

एक्सप्रेस ट्रेन को सुपरफास्ट बनाया जाता था
यह बात 2005-06 के रेल बजट की है। उस बजट में नई दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली लोकप्रिय ट्रेन लखनऊ मेल को सामान्य मेल/एक्सप्रेस से एलिवेट कर सुपरफास्ट का दर्जा दिया गया था। एक नवंबर 2017 से भी 48 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट का दर्जा दिया गया था। कुछ लोग कहते हैं कि इस फैसले के पीछे कमाई का गणित होता है। क्योंकि सिर्फ सुपरफास्ट का दर्जा दे देने से रेलवे की सेम ट्रेन से कमाई बढ़ जाती है।

 

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