पलवल
शहर के व्यस्त रेलवे रोड स्थित होली चिल्ड्रन स्कूल के सामने बने एमएस इलेक्ट्रानिक्स के एक बड़े शोरूम में अचानक भीषण आग लग गई।
इस दुर्घटना में शोरूम में रखा करोड़ों रुपये का इलेक्ट्रानिक सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन आग की भयंकर लपटों और धुएं ने आसपास के इलाके में अफरा-तफरा मचा दी।
दूसरी मंजिल से उठा धुएं का गुबार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना रात करीब 12 बजे की है। शोरूम की दूसरी मंजिल से अचानक धुआं निकलने लगा। शुरुआती दौर में किसी को इसका पता नहीं चला, लेकिन शोरूम के सामने स्थित दुकानों के ऊपर बने मकान में रह रहे एक सतर्क व्यक्ति ने खिड़की से धुआं उठते देखा।
उन्होंने तुरंत इसकी सूचना शोरूम के मालिक शुभम को फोन पर दी। सूचना मिलते ही मालिक तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिना देर किए फायर ब्रिगेड विभाग को फोन पर घटना की जानकारी दी।
फायर ब्रिगेड की 15 गाड़ियों ने की पांच घंटे मशक्कत
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर रवाना हुईं। आग इतनी विकराल थी कि उस पर काबू पाने के लिए कुल 15 दमकल गाड़ियों को लगाना पड़ा। फायर ब्रिगेड कर्मियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर लगभग पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। तब तक शोरूम के अंदर रखा सारा कीमती सामान जल चुका था
इन सामानों को पहुंचा नुकसान
शोरूम की दूसरी मंजिल पर मुख्य रूप से एलईडी टीवी, हाई-फाई म्यूजिक सिस्टम, वाटर प्यूरीफायर (आरओ सिस्टम), माइक्रोवेव ओवन और अन्य आधुनिक घरेलू इलेक्ट्रानिक उपकरण बड़े पैमाने पर स्टॉक में रखे हुए थे।
आग के विकराल रूप धारण करने के कारण इनमें से एक भी सामान सुरक्षित नहीं बचाया जा सका। शुरुआती आकलन के अनुसार, मालिक को लगभग दो करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बिजली कटौती और पानी की कमी से बढ़ी मुश्किलें
आग बुझाने के अभियान के दौरान दमकल विभाग के कर्मचारियों को भारी प्रशासनिक व तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। घटना के दौरान रात को हल्की वर्षा भी हुई, जिसके चलते इलाके की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई। बिजली न होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पानी भरने के लिए खासी परेशानी उठानी पड़ी।
मजबूरन गाड़ियों को पानी भरने के लिए शहर से दूर बघोला स्थित एक निजी कंपनी तक के फेरे लगाने पड़े। पानी लाने और ले जाने की इस प्रक्रिया में बहुमूल्य समय व्यर्थ हुआ, जिससे आग पर समय रहते पूरी तरह काबू पाने में अधिक वक्त लग गया।
प्लास्टिक और लकड़ी के शोकेस ने बार-बार भड़काई आग
दमकल कर्मियों ने बताया कि शोरूम के भीतर भारी मात्रा में प्लास्टिक और लकड़ी के डिजाइनर शोकेस व रेक बने हुए थे। आग बुझाने के दौरान जब भी पानी डाला जाता, तो कुछ देर के लिए आग शांत होती, लेकिन लकड़ी और प्लास्टिक के संपर्क में आकर वह बार-बार और तेजी से भड़क उठती थी।















Leave a Reply