ब्रांडिंग से निखर उठा टेराकोटा का कारोबार:दशहरा-दीपावली का ऑर्डर पूरा करने में जुटे टेराकोटा शिल्पकार




9 साल पूर्व तक जिस टेराकोटा शिल्प के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती थी, वही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना से ‘लोकल’ से ‘नेशनल’ और ग्लोबल बाजार तक मजबूत पहचान बना रही है। सीएम योगी की ब्रांडिंग से टेराकोटा का कारोबार लगातार निखर रहा है। टेराकोटा के शिल्पकार अब पूरे साल काम में व्यस्त रहते हैं। वर्तमान समय में ये शिल्पकार दशहरा और दीपावली के त्योहार को लेकर मिले एडवांस ऑर्डर की सप्लाई के लिए उत्पाद तैयार करने में दिनरात जुटे हुए हैं। शिल्पकारों का अनुमान है कि आगामी त्योहारी सीजन में दस करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होगा। टेराकोटा बाजार के विस्तार और इससे जुड़े शिल्पकारों के आर्थिक उत्थान का श्रेय योगी सरकार की ODOP योजना और सीएम योगी द्वारा अनेक मंचों से की गई ब्रांडिंग को जाता है। ODOP का प्लेटफार्म मिलने से टेराकोटा शिल्प के कारोबार ने ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि अब उसकी पहुंच देश के कोने कोने तक हो रही है। ओडीओपी में शामिल होने के बाद टेराकोटा शिल्पकारों को संसाधनगत, वित्तीय व तकनीकी मदद तो मिली तो इसका बाजार दिनोंदिन बढ़ता गया। इलेक्ट्रिक चाक, पगमिल, डिजाइन टेबल आदि मिलने से शिल्पकारों का काम आसान और उत्पादकता तीन से चार गुना हो गई। गुणवत्ता में सुधार अलग से। वर्तमान में टेराकोटा के मूल गांव औरंगाबाद के साथ ही गुलरिहा, भरवलिया, जंगल एकला नंबर-2, अशरफपुर, हाफिज नगर, पादरी बाजार, बेलवा, बालापार, शाहपुर, सरैया बाजार, झुंगिया, झंगहा क्षेत्र के अराजी राजधानी आदि गांवों में टेराकोटा शिल्प का काम वृहद स्तर पर चल रहा है। ओडीओपी में शामिल होने के बाद बाजार बढ़ने से करीब एक तिहाई नए लोग भी टेराकोटा के कारोबार से जुड़े हैं। गोरखपुर में वर्तमान में 500 से अधिक परिवार टेराकोटा उद्यम से जुड़े हुए हैं। राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत शिल्पकार राजन प्रजापति का कहना है कि दशहरा और दीपावली को लेकर साल के शुरुआत में ही भरपूर ऑर्डर मिल चुका है। टेराकोटा के सजावटी उत्पादों की सर्वाधिक मांग देश के दूसरे राज्यों के शहरों अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली व राजस्थान के कई शहरों से है। अभी भी देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार आर्डर मिल रहे हैं, जिससे उत्पादन में तेजी लाई गई है। त्योहारी सीजन को देखते हुए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उनके परिवार के सभी सदस्य इस काम में हाथ बंटा रहे हैं, ताकि तय समयसीमा में सभी आर्डर पूरे किए जा सकें। राजन बताते हैं कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से टेराकोटा का काम इतना बढ़ गया है कि तनिक भी फुर्सत नहीं मिल पा रही। कभी स्थानीय बाजार में ही उत्पाद नहीं बिक पाते थे जबकि आज हमारे उत्पाद की मांग पूरे देश में हैं। 9 साल में शिल्प से उद्यम की तरफ बढ़ा टेराकोटा
2017 के पहले तक टेराकोटा शिल्पकारों के पास संसाधनों का अभाव था। वह सारा काम हाथ से करते थे। ओडीओपी में शामिल होने के बाद उन्हें इलेक्ट्रिक चाक मिले, पगमील मशीन मिली। हस्तचालित चाक की तुलना में इलेक्ट्रिक चाक पर तेजी से कलाकृतियां बन जाती हैं। जबकि पगमील के जरिए 24 घंटे के बराबर मिट्टी की गुथाई एक घंटे में हो जाती है। इसका असर यह हुआ कि जितने उत्पाद एक दिन तैयार होते थे, अब उतने दो घंटे में बन जाते हैं। पूंजी का संकट दूर करने के लिए भारी अनुदान पर आसानी से ऋण मिल जाने से काम और भी आसान हो गया। शिल्पकारों को संसाधन उपलब्ध कराने साथ ही सरकार ने बड़ा बाजार दिलाने के लिए इसकी ब्रांडिंग भी की। बड़े महानगरों में तमाम प्रदर्शनी लगवाई, शिल्पकारों को पुरस्कार देकर उत्साहित किया। राष्ट्रपति सहित अन्य बड़ी हस्तियों को भेंट करने के लिए टेराकोटा के उत्पादों को प्राथमिकता दी।



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