आम लोगों को मनोरंजन, खुली हवा और परिवार के साथ समय बिताने की सुविधा देने के उद्देश्य से बनाए गए चास नगर निगम के अमृत पार्क अब गलत तरीके से कमाई का बड़ा जरिया बन गए हैं। बच्चों के खेलने, बुजुर्गों के टहलने और परिवारों के घूमने के लिए विकसित इन पार्कों में अब शादी-विवाह, रिसेप्शन, बर्थडे पार्टी और निजी कार्यक्रमों का आयोजन धड़ल्ले से होने लगा है। नगर निगम की जांच में सामने आया है कि इन आयोजनों से करोड़ों रुपए की कमाई तो हुई, लेकिन नियम के मुताबिक निगम को मिलने वाला हिस्सा जमा नहीं कराया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार अमृत पार्क फेज-1, फेज-2 और फेज-5 में बड़े पैमाने पर निजी कार्यक्रम आयोजित किए गए। नियम के तहत पार्क संचालन से होने वाली आय का 40 प्रतिशत हिस्सा नगर निगम को जमा करना अनिवार्य है, लेकिन संचालकों ने यह राशि जमा नहीं की। मामले में करीब एक करोड़ रुपए की देनदारी सामने आने की बात कही जा रही है। नगर निगम ने संबंधित संचालकों को नोटिस जारी किया है। अपर नगर आयुक्त संजीव कुमार ने बताया कि फेज-5 के संचालक ने जवाब देते हुए पार्क को जिला प्रशासन के अधीन बताया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्क संचालन का वर्क ऑर्डर नगर निगम की ओर से जारी किया गया था, इसलिए राजस्व का हिस्सा निगम को ही जमा करना होगा।
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पार्क संचालकों ने की करोड़ों की कमाई अब 40% राजस्व वसूलेगा नगर निगम












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