Bundle of new Rs 10-20 notes seized, culprit absconding


रायपुर1 घंटे पहले

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राजधानी के अशोका मिलेनियम प्लाजा स्थित हंस ट्रैवल्स के गोदाम से 6 मई को 10-20 रुपए के नए नोटों की खेप मिलने के मामले में कई नए चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बैंकों से अवैध तरीके से नए नोट खरीदकर कमीशन लेकर उनकी सप्लाई की जा रही है। इसमें बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की भी भूमिका सामने आ रही है। ट्रांसपोर्टर के जरिए नोट भेजने और मंगाने वालों को नोटिस जारी कर पूछताछ की जा रही है। बड़े शहरों में शगुन और कई तरह के कार्यक्रमों में नए नोटों की मांग ज्यादा रहती है, जिसका फायदा उठाकर यह नेटवर्क सक्रिय है। 16 से 20 लाख के नए नोट पार्सल के रूप में भेजे जा रहे हैं। इन लेन-देन की एंट्री सरकारी रिकॉर्ड में भी नहीं की जाती है।

जांच में यह भी सामने आया है कि पहले पुराने नोटों को बोरियों में भरकर बंगाल और ओडिशा के दलालों के पास भेजा जाता है। वहां बैंकों से इन्हें बदला जाता है। इसके बदले मोटा कमीशन दिया जाता है। बाद में बैंकों से मिले नए नोटों को पार्सल से दूसरे शहरों में भेजा जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली के कमल किशोर गुप्ता ने 20 लाख के पुराने नोट भेजे थे, जिसके बदले उन्हें 16 लाख के नए नोट भेजे जा रहे थे। यह पार्सल बंगाल से उदय सिंह बिस्वाल ने भेजा था। इस पूरे नेटवर्क में ट्रांसपोर्टर की बड़ी भूमिका सामने आई है। इस मामले में अब पुलिस के साथ ही आयकर विभाग और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने भी जांच शुरू कर दी है।

हवाला नेटवर्क, विदेशों में कनेक्शन रायपुर में हवाला सिस्टम बेहद मजबूत है। राज्य बनने से पहले से ही यह काम हो रहा है। अब यह नेटवर्क विदेशों तक फैल चुका है। रकम जितनी बड़ी होती है, कमीशन उतना कम लिया जाता है। रोजाना करोड़ों का लेन-देन हो रहा है। रामसागरपारा, भैंसथान, स्टेशन रोड, पंडरी कपड़ा मार्केट, सदर बाजार और गोलबाजार इलाके हवाला कारोबार के प्रमुख केंद्र हैं। यहां कोड सिस्टम से रकम का लेन-देन होता है। नोट का आधा टुकड़ा दिखाने पर पूरी रकम दी जाती है। इस कारोबार में 1 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है। सराफा, सरिया, गुटखा, तंबाकू, अनाज और कपड़ा कारोबार से जुड़े व्यापारी भी इस नेटवर्क से जुड़े हैं।

आरबीआई गाइडलाइन का उल्लंघन अधिवक्ता विपिन अग्रवाल ने बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की क्लीन नोट पॉलिसी और करेंसी चेस्ट प्रबंधन के कड़े नियम हैं। कोई भी बैंक इतनी बड़ी मात्रा में नए नोट किसी दलाल को सीधे नहीं दे सकता। बैंक अधिकारी आम लोगों को शॉर्टेज (नोटों की कमी) का बहाना बनाकर नए नोट देने से मना कर देते हैं। वही नई गड्डियां दलालों को कमीशन लेकर बेच देते हैं। इसके बदले उन्हें प्रति बंडल (गड्डी) के हिसाब से तय कमीशन कैश में मिलता है। बैंक में पुराने नोटों की बदली प्रक्रिया के तहत की जाती है। नोट बदलने के लिए कंपनी के प्रतिनिधि या कारोबारी या व्यक्ति को खुद जाना होता है।

नोटों को जांच के लिए भेजा गया

पुलिस ने 10 और 20 रुपए के जब्त नोटों को जांच के लिए भेजा है। आशंका है कि नए नोटों की आड़ में नकली नोट भी बाजार में खपाए जा रहे हैं। आमतौर पर लोग 100, 200 और 500 रुपए के नोटों की जांच करते हैं, लेकिन 10 और 20 रुपए के नोट बिना जांच के ही स्वीकार कर लेते हैं। इसी का फायदा उठाकर तस्कर छोटे नोटों की नकली कॉपी बनाकर बाजार में खपा रहे हैं।

आयकर विभाग की जांच जारी

नोटों को जब्त कर मामले की आगे जांच के लिए आयकर विभाग को पत्र लिखा गया है। वहीं से इसकी जांच हो रही है। पुलिस को अभी जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। – राहुल देव शर्म, एडिशनल डीसीपी



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