हिसार.
गांव भेरियां के मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स में बुधवार को शानदार जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की। पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग के राउंड आफ 32 मुकाबले में अंकुश ने बहरीन के हम्सा वोगेल को 5-0 से हराकर राउंड आफ 16 में जगह बनाई।
कामनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद एशियन गेम्स में उतरे अंकुश ने पूरे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया और पांचों जजों ने उन्हें विजेता माना। अंकुश ने मुकाबले की शुरुआत संभलकर की, लेकिन जल्द ही अपनी लय हासिल कर ली। पहले राउंड में उन्होंने प्रभावी पंच लगाए और सभी पांच जजों ने यह राउंड उनके पक्ष में दिया। दूसरे राउंड में वोगेल ने आक्रामक शुरुआत करने का प्रयास किया, लेकिन अंकुश ने मजबूत पंचों के काम्बिनेशन से जवाब देते हुए दबदबा बनाए रखा। दूसरे राउंड में भी सभी जजों ने अंकुश को 5-0 से आगे रखा। अंतिम राउंड में भी अंकुश ने अपनी बढ़त कायम रखी और वोगेल भारतीय मुक्केबाज को परेशान करने में सफल नहीं हो सके। जजों ने सर्वसम्मति से अंकुश के पक्ष में फैसला सुनाया।
कबड्डी से शुरू किया था खेल सफर
अंकुश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने खेल करियर की शुरुआत कबड्डी से की थी और स्टेट स्तर पर स्वर्ण पदक भी जीता था। बाद में पिता सुरेश पंघाल की सलाह पर उन्होंने बाक्सिंग को अपना खेल चुना। शुरुआत में गांव के लोग उनके इस फैसले को लेकर मजाक भी करते थे, लेकिन अंकुश ने मेहनत जारी रखी। 14 वर्ष की उम्र में अंकुश ने स्कूली नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। कोरोना काल में भी उन्होंने प्रशिक्षण जारी रखा। वर्ष 2024 में वह सेना में हवलदार बने। उनके पिता सुरेश पंघाल पूर्व राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी हैं और होटल का संचालन करते हैं। मां मुकेश देवी के अलावा बहनें नीलम, अंजू बाला और नीतू रानी भी खेलों से जुड़ी हैं।
कामनवेल्थ का स्वर्ण मां को किया था समर्पित
कामनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अंकुश ने अपना पदक मां मुकेश देवी को समर्पित किया था। अब एशियन गेम्स में पहले मुकाबले में जीत के साथ उन्होंने अगले दौर में जगह बना ली है। उनका लक्ष्य एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।














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