झारखंड में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स मजबूत, STF कमांडो भी शामिल

 रांची
 झारखंड के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को मजबूत बनाया गया है। पहले से कार्यरत इस बल को सीआईडी झारखंड के एडीजी मनोज कौशिक ने री-स्ट्रक्चर किया है।

इसमें न सिर्फ पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाई गई है, बल्कि झारखंड जगुआर या स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के 40 कमांडो की एक टुकड़ी को भी इस बल के साथ जोड़ा गया है।

ये वही कमांडो हैं, जिन्हें माओवादियों के विरुद्ध अभियान में लगाया गया था। 40 कमांडों का एक पूरा असाल्ट ग्रुप इससे जुड़ा हुआ है। इसे इस कदर मजबूत बनाया गया है, ताकि यह पूरे राज्य में कहीं भी बिना किसी की मदद लिए छापेमारी कर सके और केस दर्ज कर सके।

झारखंड में नशे के विरुद्ध मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सख्त निर्देश के बाद राज्य में अफीम, गांजा, ब्राउन शुगर, प्रतिबंधित सीरप, इंजेक्शन व प्रतिबंधित दवाओं के विरुद्ध अब एएनटीएफ का छापामारी अभियान तेज होगा।

हाल ही में राज्य सरकार ने नारकोटिक्स के विरुद्ध अभियान, गुप्तचरों के लिए योजनाएं सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संकल्प जारी किया है।

एएनटीएफ व सक्षम एजेंसी की तरह काम करेगी, आरोपितों के विरुद्ध एफआईआर की भी स्वतंत्रता होगी। इस एएनटीएफ की सीधी निगरानी सीआईडी के एडीजी करेंगे। इसका नियंत्री विभाग भी सीआईडी ही होगा।

इसमें शामिल अधिकारी सूचना संग्रह कर, अंतरराज्यीय समन्वय, वित्तीय लेन-देन के बिंदु पर काम करेंगे और सभी 24 जिलों के एसएसपी, एसपी के समन्वय से अभियान संचालित करेंगे।

राज्य के 14 जिलों में अफीम की खेती
एएनटीएफ के रडार पर राज्य के वे 14 जिले हैं, जहां सर्वाधिक अफीम की खेती होती है। इन जिलों में रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, सरायकेला-खरसांवा, पलामू, लातेहार, गढ़वा, हजारीबाग, चाईबासा, चतरा, कोडरमा व देवघर शामिल हैं।

एएनटीएफ का मानना है कि नशे के सौदागरों के पास बड़े हथियार भी होते हैं, जिससे वे सूचनादाता से लेकर अभियान में शामिल पदाधिकारियों-जवानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।

यही वजह है कि तेज तर्रार अधिकारियों के अलावा जवानों को भी इसमें शामिल किया गया है। झारखंड का चतरा, खूंटी, पलामू, लातेहार, और रांची के ग्रामीण इलाकों में अफीम की खेती सर्वाधिक होती है।

यहां से अफीम को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली भेजा जाता है। झारखंड में ब्राउन शुगर की खेप मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद और मालदा रूट) तथा उत्तर प्रदेश के बरेली रूट से आता है। पूर्व में बड़ी संख्या में ब्राउन शुगर की जब्ती हुई है।

 

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