गुवाहाटी2 मिनट पहले
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असम विधानसभा का सत्र सोमवार से शुरू हुआ।
असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल सोमवार को पेश किया गया। इसे पटल पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से राज्य के संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने रखा। इस बिल को दो हफ्ते पहले कैबिनेट से मंजूरी मिली थी।
इस बिल पर 27 मई को चर्चा होगी। यदि यह बिल पारित हो जाता है, तो असम देश का तीसरा ऐसा राज्य बन जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात ऐसा कर चुके हैं।
CM सरमा के मुताबिक अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रहेंगी। साथ ही ‘पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों’ को भी इससे छूट दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सरमा ने चुनाव के बाद सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में कहा था, ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड चार विषयों को कवर करेगा। शादी की न्यूनतम उम्र, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार, और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामले।’
उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य

उत्तराखंड में UCC लागू हो गया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसका ऐलान किया था।
- 6 फरवरी 2024 को विधानसभा में UCC विधेयक पेश हुआ।
- 7 फरवरी 2024 को पारित हुआ। 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने UCC विधेयक को मंजूरी दी।
- क्रियान्वयन समिति ने 18 अक्टूबर 2024 को नियमावली सरकार को सौंपी।
- 20 जनवरी 2025 को नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिली। इस तरह उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बन गया।
बेटे और बेटी दोनों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा। इससे फर्क नहीं पड़ेगा कि वह किस कैटेगरी के हैं। कपल अगर लिव इन में रह रहे हैं तो उन्हें इसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। हालांकि ये सेल्फ डिक्लेरेशन जैसा होगा, लेकिन इस नियम से अनुसूचित जनजाति के लोगों को छूट होगी। पूरी खबर पढ़ें
गुजरात UCC बिल पास करने वाला दूसरा राज्य
देश में उत्तराखंड के बाद गुजरात यूसीसी बिल पास करने वाला दूसरा राज्य है। इसमें विधेयक में वसीयत न होने की स्थिति में माता-पिता, बच्चों और पति/पत्नी को संपत्ति में बराबर हिस्सा देने का प्रावधान है। अब विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में सभी पर समान नियम लागू होंगे। पूरी खबर पढ़ें

आजाद भारत से पहले गोवा में UCC
- उत्तराखंड गोवा के बाद पहला राज्य बनेगा जहां UCC लागू होगा। भले ही गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य होगा।
- सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई।
- 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी।
- आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था।















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