लखनऊ
उत्तर प्रदेश में अगले पांच महीनों में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो जाएगा। लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा ने बड़ी तैयारी अभी से शुरू कर दी है। सबसे महत्वपूर्ण काम प्रत्याशियों का चयन है। इसके लिए दिल्ली में मंथन शुरू हो गया है। खुद भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने मोर्चा संभाल लिया है। यूपी के एक-एक सांसद से मिलकर फीडबैक ले रहे हैं। उनसे न केवल राज्य में जमीनी हकीकत का जायजा लिया जा रहा है बल्कि भावी प्रत्याशियों और मौजूदा विधायकों पर राय भी ली जा रही है। इसके साथ ही अलग से सर्वे भी शुरू हो चुका है। इन सर्वे का उद्देश्य संगठनात्मक मजबूती, भावी उम्मीदवारों और चुनावों को प्रभावित करने वाले प्रमुख स्थानीय मुद्दों पर फीडबैक जुटाना है। पिछले हफ्ते दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नितिन नवीन से मुलाकात की थी।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यूपी के भाजपा सांसदों के साथ आमने-सामने (वन-ऑन-वन) बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों के दौरान सांसदों से उनके लोकसभा क्षेत्र में जमीन पर हालात, स्थानीय मुद्दों, संगठनात्मक तैयारियों और पार्टी के प्रति जनता के रुख पर प्रतिक्रिया ली जा रही है। भाजपा अध्यक्ष अब तक 25 से ज्यादा सांसदों से मुलाकात कर चुके हैं। इन बातचीत के जरिए पार्टी नेतृत्व चुनावों से पहले राज्य के अलग-अलग इलाकों के हालात का विस्तृत आकलन कर रहा है। इससे जमीनी स्तर पर प्रमुख मुद्दों की पहचान भी हो रही है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बना था इतिहास
बीजेपी का उद्देश्य चुनावों से काफी पहले अपने संगठनात्मक और बूथ-स्तरीय तैयारियों को मजबूत करना और उम्मीदवार चयन के साथ चुनावी रणनीति को आकार देना है। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में से 255 सीटें जीती थीं। तब उसका वोट शेयर 41.29 प्रतिशत था। 2022 में 37 वर्षों में पहला ऐसा मौका था जब कोई पार्टी अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में वापसी करने में सफल हुई थी। इस बार भाजपा की नजरें हैट्रिक पर हैं। पार्टी का साफ मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की जीत से ही 2029 के लोकसभा चुनाव की राह आसान होगी।
विधानसभा में जीत के बाद लोकसभा में मिली थी चोट
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने 2022 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ी चोट दी थी। 2022 के चुनाव में 403 में से केवल 111 सीटें जीतकर सत्ता की रेस से बाहर हुई सपा ने 2024 में कांग्रेस के साथ मिलकर लोकसभा की आधी से ज्यादा सीटें जीत ली थीं। माना जाता है कि सपा की इस जीत के कारण ही भाजपा लोकसभा में अकेले बहुमत हासिल करने से दूर रह गई थी। सपा ने लगातार चार चुनाव 2014, 2017, 2019 और 2022 हारने के बाद यह जीत हासिल की थी। ऐसे में अगला विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
सपा-कांग्रेस से ही सीधा मुकाबला होने की संभावना
इस विधानसभा चुनाव में भी सपा और कांग्रेस के मिलकर मैदान में उतरने की पूरी संभावना है। मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान पहले ही कर रखा है। बसपा ने विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट जीती थी और लोकसभा में उसका खाता भी नहीं खुल सका था। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का मुख्य मुकाबला सपा-कांग्रेस गठबंधन से ही होगा।
इस बार सुभासपा और रालोद भी साथ
बीजेपी के लिए बड़ी राहत की बात यह है कि इस बार ओपी राजभर की सुभासपा और जयेंद्र चौधरी की रालोद भी उसके साथ है। पिछली बार राजभर और जयेंद्र चौधरी ने सपा के साथ विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसके अलावा पहले की तरह संजय निषाद की निषाद पार्टी और अनुप्रिया पटेल की अपना दल भी भाजपा के साथ है।
















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