Chhattisgarh Pharma Industrial Policy 2024-30: फार्मा निवेश का नया हब बना छत्तीसगढ़, 18 महीने में ₹992 करोड़ के प्रस्ताव

रायपुर 

छत्तीसगढ़ सरकार की औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के लागू होने के बाद से राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है, जिसमें पारंपरिक उद्योगों से हटकर फार्मास्यूटिकल जैसे नए जमाने के क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। नीति आयोग द्वारा जारी ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स 2026’ में विनियामक सुगमता और संस्थागत वातावरण के लिए बड़े राज्यों की श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ ने पिछले 18 महीनों के भीतर ₹992.53 करोड़ के फार्मास्यूटिकल निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से ₹216 करोड़ की लागत वाली चार परियोजनाएं धरातल पर क्रियान्वयन के उन्नत चरणों में पहुंच चुकी हैं, जो यह स्पष्ट दर्शाती हैं कि निवेशकों की रुचि केवल कागजी एमओयू तक सीमित न रहकर वास्तविक विनिर्माण गतिविधियों में बदल रही है।

ज़मीन पर तेज़ी से आकार ले रही इन चार प्रमुख परियोजनाओं में 9एम इंडिया, शंकरा लेटेक्स इंडस्ट्रीज, अविला फार्मास्यूटिकल्स और वाइटलिस हेल्थ सर्विसेज शामिल हैं, जो निर्माण और स्थापना के विभिन्न चरणों में हैं। 9एम इंडिया और शंकरा लेटेक्स इंडस्ट्रीज की उत्पादन इकाइयां वर्तमान में निर्माणाधीन हैं और जल्द ही परिचालन शुरू करने की स्थिति में होंगी, जबकि अविला फार्मास्यूटिकल्स और वाइटलिस हेल्थ सर्विसेज के प्रोजेक्ट भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। फार्मास्यूटिकल निर्माण जैसे क्षेत्र में, जहां निवेश निर्णय अत्यंत सतर्कता से लिए जाते हैं और परियोजना की चक्र अवधि लंबी होती है, इतनी तेजी से कार्यान्वयन होना राज्य के प्रशासनिक तंत्र और निवेशकों के भरोसे को मजबूती से रेखांकित करता है।

राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस औद्योगिक बदलाव पर जोर देते हुए स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ सचेत रूप से अपने औद्योगिक आधार का विविधीकरण कर रहा है और फार्मास्यूटिकल उन उभरते हुए क्षेत्रों में से एक है जिन्हें बड़े पैमाने पर स्थापित करने के लिए राज्य पूरी तरह तैयार है। नवा रायपुर में दिख रही यह व्यावसायिक गतिशीलता और क्रियान्वित हो रही परियोजनाएं निवेशकों के उस विश्वास को सुदृढ़ करती हैं जो वे छत्तीसगढ़ की आधुनिक विनिर्माण तैयारियों पर जता रहे हैं। इसके साथ ही, यह सफलता राज्य सरकार द्वारा व्यापार को आसान बनाने (Ease of Doing Business) के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को भी प्रमाणित करती है।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 व प्रोत्साहन

    ‘थ्रस्ट सेक्टर’ का दर्जा: औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत फार्मास्यूटिकल्स को प्राथमिकता वाला (Thrust Sector) क्षेत्र घोषित किया गया है, जिसके माध्यम से निवेशकों को विशेष वित्तीय व प्रशासनिक छूट दी जा रही है।

    वित्तीय सहायता एवं रियायतें: निवेशकों को पूंजीगत सहायता (Capital Assistance), 12 वर्षों तक शुद्ध SGST की प्रतिपूर्ति, बिजली शुल्क व स्टाम्प ड्यूटी में 100% छूट और शुरुआती निवेशकों के लिए विशेष अग्रणी लाभ शामिल हैं।

    उद्देश्य: इन रियायतों का मुख्य लक्ष्य परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना, शुरुआती निवेशकों को सुरक्षा देना और राज्य में दीर्घकालिक विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट, 2026

    देश में पहला प्रयास: छत्तीसगढ़ जोखिम-आधारित विनियामक ढांचा (Risk-based Regulatory Framework) पेश करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

    प्रक्रियाओं का सरलीकरण: इस कानून का उद्देश्य अनुपालन (Compliance) के बोझ को घटाना, सरकारी स्वीकृतियों को सुगम बनाना और परियोजनाओं की शुरुआत में लगने वाले समय को कम करना है।

नवा रायपुर का फ्लैगशिप ‘फार्मा पार्क’

    विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर: नवा रायपुर में लगभग 142 एकड़ क्षेत्र में एक अत्याधुनिक ‘फार्मा पार्क’ विकसित किया जा रहा है, जो प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी से लैस है।

    तेजी से आवंटन: प्लॉट आवंटन शुरू होने के मात्र 1 वर्ष के भीतर 7 प्रमुख प्लॉट्स आवंटित किए जा चुके हैं, जो राज्य में मजबूत होते फार्मा इकोसिस्टम को दर्शाते हैं।

छत्तीसगढ़ का यह नया फार्मास्यूटिकल इकोसिस्टम केवल भूमि और वित्तीय प्रोत्साहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एम्स रायपुर (AIIMS Raipur), आईआईटी भिलाई (IIT Bhilai), आईआईएम रायपुर (IIM Raipur) और एनआईटी रायपुर (NIT Raipur) जैसे देश के शीर्ष संस्थानों का मजबूत शैक्षणिक और तकनीकी समर्थन प्राप्त है। ये संस्थान उद्योग को निरंतर कुशल कार्यबल, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार की सुविधा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, 26,000 मेगावाट से अधिक की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता, लगातार सुधरती सड़क, रेल व हवाई कनेक्टिविटी और मध्य भारत के प्रमुख बाजारों से निकटता के बल पर छत्तीसगढ़ पुराने औद्योगिक ढांचों पर निर्भर रहने के बजाय एक आधुनिक, स्केलेबल और भविष्य के अनुकूल फार्मास्यूटिकल विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

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