लखनऊ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधानसभा के मॉनसून सत्र के शुभारंभ पर सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि विधायिका आम जनता की आवाज उठाने का सर्वोच्च मंच है और सदन के समय का उपयोग जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए किया जाना चाहिए। सीएम ने बड़ी घोषणा की कि सरकार एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन को लागू करने के साथ ही न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करने जा रही है। आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रसोइयों व ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है।
सत्र के पहले दिन पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायिका किसान, युवा, महिला तथा समाज के विभन्नि वर्गों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और उनके समाधान का माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याएं सदन में उठाकर उनके समाधान का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की इसी परंपरा के माध्यम से प्रदेश में अनेक सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके हैं।
किसानों के जीवन में सुधार लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकार ने छह करोड़ से अधिक गरीबों के जीवन में विभन्नि जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से बदलाव लाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में सुधार लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के दौरान अनेक चीनी मिलें बंद हुईं और किसानों के हितों की उपेक्षा की गई। उनका आरोप था कि उस समय गन्ना किसानों का भुगतान लंबित रहता था और किसान कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए विवश थे।
राम मंदिर को लेकर सपा पर बड़ा हमला
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों की उपज की सीधी खरीद सुनिश्चित कर रही है तथा गन्ना मूल्य का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि किसान और युवा सरकार की प्राथमिकता में हैं तथा उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। अयोध्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने विपक्ष पर हमला बोला और कहा कि आज राम मंदिर के मुद्दे को वही लोग उठा रहे हैं जिन्होंने अतीत में रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं और न्यायालय में राम मंदिर निर्माण का विरोध करने के लिए वकीलों की फौज खड़ी की थी।
















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