शाह 2 दिवसीय बस्तर दौरे पर हैं। 18 मई को MP, CG, UK के CM भी जगदलपुर पहुंच गए थे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। पहली बार बस्तर में इस स्तर की परिषद की बैठक आयोजित की जा रही है।
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अमित शाह दो दिवसीय बस्तर दौरे पर हैं और आज उनके दौरे का दूसरा दिन है। बैठक के बाद शाह मीडिया से भी बातचीत करेंगे। खास बात यह है कि पहली बार बस्तर में केंद्रीय गृह मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस होने जा रही है।
सुरक्षा से विकास तक बदलती तस्वीर दिखाने की कोशिश
बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण देशभर में चर्चा का केंद्र रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार की यहां क्षेत्रीय परिषद की बैठक करवाना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है।
इससे यह बताने की कोशिश है कि बस्तर अब सिर्फ नक्सल प्रभावित इलाका नहीं, बल्कि विकास और प्रशासनिक गतिविधियों का नया केंद्र बन रहा है।
जिस इलाके में कभी बड़े नेताओं के दौरे सुरक्षा कारणों से सीमित रहते थे, वहां अब चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और सरकार की रणनीति से हालात में बदलाव आया है।

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नक्सलवाद पर सख्त संदेश देने की तैयारी
गृह मंत्री लगातार यह कह चुके हैं कि केंद्र सरकार नक्सलवाद को खत्म करने के लिए निर्णायक रणनीति पर काम कर रही है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हुई है और कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं।
31 मार्च 2026 को बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है।

अमित शाह जगदलपुर के आसना में स्थित बादल अकादमी पहुंचे थे।
विकास, समन्वय और सीमावर्ती मुद्दों पर होगी चर्चा
मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों के बीच आपसी समन्वय, कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। खासकर नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर भी फोकस रह सकता है।

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बस्तर को नई पहचान देने की कोशिश
गृह मंत्री के दौरे और परिषद की बैठक को बस्तर की नई छवि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अब बस्तर केवल संघर्ष की पहचान नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन, निवेश, विकास और प्रशासनिक गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में उभरेगा।
यही वजह है कि बैठक के बाद गृह मंत्री का मीडिया से संवाद भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे केंद्र सरकार बस्तर को लेकर अपना विजन सामने रख सकती है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नक्सलवाद खात्मे के बाद पहली बार बस्तर पहुंचे। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों का 50 सालों में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हम 4-5 सालों में करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जब तक बस्तर विकसित नहीं होगा, तब तक हमारा संकल्प अधूरा रहेगा। पढ़ें पूरी खबर…












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