कलकत्ता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी इन दिनों मुश्किलों का सामना कर रही हैं। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस में बागियों की झरी लग गई। हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बागी विधायकों और अन्य नेताओं ने ममता बनर्जी को उनकी ही बनाई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से बेदखल कर दिया। इस बीच उनकी सबसे करीबी सांसद और टीएमसी की फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा ने भी चौंकाने वाला बयान दिया है।
महुआ मोइत्रा (TMC) और शुभेंदु अधिकारी (BJP) मौजूदा समय में एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। हालांकि, उनका यह बयान ममता की चिंता बढ़ा सकती है।
महुआ मोइत्रा ने बीते 22 जून को बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ की है। उन्हें एक अच्छा दोस्त बताया और पुराने दिनों को याद किया जब शुभेंदु ने उनकी मदद की थी।
शुभेंदु मेरे अच्छे दोस्त
महुआ कहती हैं, “शुभेंदु मेरे अच्छे दोस्त हैं। जब हम एक पार्टी में थे तो उन्होंने मेरा काफी साथ दिया। जब मैं करीमपुर से चुनाव लड़ी थी तो सिर्फ वही मेरे लिए प्रचार करने के लिए आए थे। मुझे जो भी मदद चाहिए होता था वह मुझे भेजते थे। जब 2014 में मुझे लोकसभा का टिकट मिलने वाला था और नहीं मिला। मैं पूरी रात रोई थी। उस समय सिर्फ शुभेंदु अधिकारी ने ही मेरा साथ दिया था। उन्होंने मुझसे कहा था- नहीं बहन, मैं हूं न। ये सारे भावनात्मक कनेक्शन रहते हैं। आज हम दोनों अलग-अलग पार्टी में हैं। बात नहीं होती है। यह अलग बात है।”
आपको बता दें कि उस समय शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में हुआ करते थे और ममता बनर्जी के बाद पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। दिसंबर 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। महुआ इस समय अपने शुरुआती राजनीतिक सफर को याद कर रही थीं।
2016 में लड़ी थी विधानसभा चुनाव
महुआ मोइत्रा ने साल 2016 में पश्चिम बंगाल की करीमपुर विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा था और जीता था। उस समय शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के कद्दावर संगठनकर्ता और नदिया जिले के पार्टी पर्यवेक्षक हुआ करते थे। महुआ उसी दौर का जिक्र कर रही हैं कि जब संगठन के अन्य नेताओं ने उनका साथ नहीं दिया, तब शुभेंदु अधिकारी ने जमीन पर उतरकर उनके लिए चुनाव प्रचार किया था।
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले महुआ मोइत्रा कृष्णानगर सीट से चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन शुरुआती चर्चाओं में जब उन्हें टिकट मिलने में संशय था तब वे भावुक हो गई थीं। उस समय शुभेंदु ने एक सीनियर सहकर्मी के नाते उन्हें ढांढस बंधाया था। बाद में महुआ को कृष्णानगर से टिकट मिला और वे जीतकर संसद पहुंचीं।














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