चंडीगढ़
कनाडा के ओंटारियो प्रांत में प्राइवेट करियर कालेजों को मिलने वाली स्टूडेंट फाइनेंशियल असिस्टेंस को लेकर जांच शुरू होने से पंजाबी समुदाय की चिंता बढ़ गई है।ओंटारियो सरकार ने ओंटारियो स्टूडेंट असिस्टेंस प्रोग्राम (ओएसएपी) के तहत वित्तीय सहायता के इस्तेमाल में संभावित अनियमितताओं को लेकर मामला ओंटारियो प्रोविंशियल पुलिस (ओपीपी) को भेज दिया है।शुरुआती आडिट में कई तरह की गड़बड़ियों की आशंका सामने आने के बाद सरकार ने व्यापक समीक्षा के लिए आडिट फर्म केपीएमजी को भी जिम्मेदारी सौंपी है।
ओंटारियो के कालेज एवं यूनिवर्सिटी मंत्री नोलन क्विन के अनुसार, प्राइवेट करियर कालेजों में ओएसएपी के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद लक्षित निरीक्षण शुरू किए गए थे।
शुरुआती जांच में कुछ कालेजों के साझा स्वामित्व, कालेजों और इमिग्रेशन सेवाएं देने वाली कंपनियों के बीच संबंध, स्टूडेंट्स के सत्यापन की कमजोर प्रक्रिया और कुछ खास भौगोलिक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आवेदन आने जैसे मामले सामने आए हैं।पहले सामने आए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान सात करियर कालेजों को ओएसएपी के तहत करीब 385 मिलियन कनाडाई डालर की ग्रांट मिली थी।
अब सरकार ने जांच पूरी होने तक प्राइवेट करियर कालेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए ओएसएपी भुगतान रोक दिया है। सरकार ने मामले की जानकारी आडिटर जनरल को भी दी है। हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किए जाने की घोषणा नहीं हुई है।
पंजाब के स्टूडेंट्स पर क्या पड़ेगा असर?
इस मामले पर पंजाब के युवाओं और उनके परिवारों की नजर है, क्योंकि ओंटारियो के कुछ प्राइवेट करियर कालेजों में पंजाबी समुदाय के स्टूडेंट्स की अच्छी-खासी भागीदारी है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स सामान्य तौर पर ओएसएपी के पात्र नहीं होते, इसलिए फंडिंग रोकने का फैसला सीधे तौर पर सभी अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स पर लागू नहीं होता।
फिर भी, यदि जांच के दौरान कालेजों के खिलाफ कार्रवाई होती है तो पढ़ाई, दाखिले और स्टूडेंट सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल सरकार ने स्टूडेंट्स के खिलाफ किसी इमिग्रेशन संबंधी कार्रवाई की घोषणा नहीं की है।
कालेजों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था करियर कालेजेज ओंटारियो ने सरकार से उन स्टूडेंट्स की फंडिंग बहाल करने की मांग की है, जिनके आवेदन पहले ही मंजूर हो चुके हैं और जो नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल हो रहे हैं।
संस्था का कहना है कि यदि किसी संस्थान में वित्तीय सहायता के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो कार्रवाई संबंधित संस्थान के खिलाफ होनी चाहिए, न कि उन स्टूडेंट्स के खिलाफ जिन्होंने स्वीकृत सहायता के भरोसे अपनी पढ़ाई जारी रखी है।
कैलगरी में भी विरोध कर चुके हैं पंजाबी स्टूडेंट्स
इससे पहले जुलाई में एक हजार से अधिक पंजाबी स्टूडेंट्स ने पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) नहीं मिलने के विरोध में कैलगरी में प्रदर्शन किया था। रिपोर्टों के अनुसार, इन स्टूडेंट्स को जालंधर की एक इमिग्रेशन फर्म के जरिए दाखिले के लिए प्रेरित किया गया था।
इस फर्म के मालिक का कनाडाई इंस्टीट्यूट आफ ओस्टियोपैथिक थेरेपी (सीआईओटी) में सह-स्वामित्व होने की बात भी सामने आई थी।
ओंटारियो में चल रही जांच के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि संभावित वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी किसकी तय होती है और जांच पूरी होने तक पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स को राहत मिलती है या नहीं। फिलहाल सरकार की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट का इंतजार है।













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