अमृतसर.
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने अपने पहले हांगकांग दौरे के दौरान विश्वभर में बसे सिख समुदाय को एकजुट रहने, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने तथा नई पीढ़ी को सिखी के मूल सिद्धांतों से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले सिखों को श्री अकाल तख्त साहिब से निरंतर जुड़े रहकर पंथ और पंजाब के हित में कार्य करना चाहिए।
हांगकांग स्थित गुरुद्वारा खालसा दीवान में श्री अकाल तख्त साहिब के सृजना दिवस को समर्पित गुरमति समागम के दौरान संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार ने कहा कि गुरुद्वारे केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि समाज को जोड़ने, संवाद स्थापित करने और सामूहिक समस्याओं के समाधान का भी महत्वपूर्ण मंच हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले सिखों के लिए अपनी मातृभाषा, इतिहास और धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
मुफ्तखोरी की मानसिकता से दूर रहने की अपील
ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि सिख समुदाय ने दुनिया के अनेक देशों में अपनी मेहनत, ईमानदारी और कर्मठता के बल पर सम्मानजनक पहचान बनाई है। उन्होंने युवाओं से मेहनत को जीवन का आधार बनाने और मुफ्तखोरी की मानसिकता से दूर रहने की अपील की। साथ ही विदेशों में बसे सिखों से अपने गांवों और जरूरतमंद परिवारों की सीधे सहायता करने का भी आग्रह किया। उन्होंने पैतृक जमीनों को बेचने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है।
एकजुट होकर मजबूत करें सिख संस्थाएं
उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां सिख समाज को श्री अकाल तख्त साहिब और केंद्रीय सिख संस्थाओं से दूर करने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में सभी सिखों का कर्तव्य है कि वे एकजुट होकर श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जैसी संस्थाओं को मजबूत करें। जत्थेदार ने विदेशों में पुराने गुटका साहिब और धार्मिक पोथियों के सम्मानपूर्वक संस्कार में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के नए कानून के कारण हांगकांग के गुरुद्वारा प्रबंधकों को पुराने गुटका साहिब और पोथियां भारत भेजने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सलाह दी कि उचित अभिलेख तैयार कर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को जानकारी देने के बाद मर्यादा के अनुसार यह प्रक्रिया अपनाई जाए।
पंजाबी विद्यालय शुरू करने का सुझाव
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में विदेशों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप पहुंचाने की व्यवस्था को पंथ के साथ विचार-विमर्श कर और अधिक सरल बनाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही बच्चों को गुरुद्वारों से जोड़ने, गुरमुखी पंजाबी सिखाने और सिख शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने हांगकांग गुरुद्वारा में आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए विशेष पंजाबी विद्यालय शुरू करने का सुझाव भी दिया। समागम के अंत में गुरुद्वारा खालसा दीवान की प्रबंधक समिति तथा विभिन्न सिख संस्थाओं ने जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज का सिरोपा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। उनके संबोधन को संगत ने पंथ की एकता, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश बताया।















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