मानसा
मानसा में नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के 12 दिन बाद भी पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। झोटा के परिजन और एक्शन कमेटी CM भगवंत मान और DGP के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।झोटा के पिता भीम सिंह ने अब मानसा के SSP वैभव चौधरी के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि झोटा की हत्या में पुलिस की भी मिलीभगत हो सकती है। इसलिए SSP को तुरंत यहां से ट्रांसफर किया जाए।
इसके अलावा सस्पेंड किए गए DSP हरजिंदर सिंह गिल और थाना सिटी-2 की SHO बेअंत कौर को तुरंत नौकरी से डिसमिस किया जाए।इसी बीच हत्या की जांच कर रही CBI ने शनिवार सुबह ही मानसा के कई मेडिकल स्टोरों में रेड की। जहां पर प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री और स्टॉक को लेकर पड़ताल की गई।
मानसा जिले में परविंदर सिंह झोटा हत्या मामले को लेकर प्रशासन और एक्शन कमेटी के बीच गतिरोध अभी भी बना हुआ है। सरकार की ओर से मामले में तालमेल बिठाने और बातचीत के लिए गठित तीन सदस्यीय आईएएस अधिकारियों की विशेष जांच टीम के साथ स्थानीय जिला परिषद हॉल में तीसरी बैठक आयोजित की गई।
करीब एक घंटे तक चली यह महत्वपूर्ण बैठक भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। जिसके चलते परविंदर सिंह झोटा का पोस्टमार्टम करवाने पर अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है। परिवार अभी भी मांगों को लेकर अड़ा हुआ है। इस बैठक में बठिंडा रेंज के DIG हरजीत सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
मांगों पर सौंपी गई रिपोर्ट
बैठक के दौरान जांच टीम की ओर से एक्शन कमेटी द्वारा रखे गए 14 मांगों पर सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट लिखित रूप में कमेटी को सौंपी गई। एक्शन कमेटी के सदस्य मानिक गोयल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि जांच दल द्वारा दी गई लिखित जानकारी का परिवार और कमेटी सदस्य बारीकी से अध्ययन और मंथन कर रहे हैं।
कुछ मुद्दों पर बनी आपसी सहमति
तीसरे दौर की बैठक को बेनतीजा नहीं कह सकते। इस दौरान कुछ मांगों को लेकर सहमति बनी है। जानकारी के मुताबिक, परविंदर सिंह झोटा के नाम पर क्षेत्र में एक ट्रामा सेंटर बनाने, सरकारी जमीन पर उनकी प्रतिमा स्थापित करने और उनके व उनके साथियों के खिलाफ पहले से दर्ज मुकदमों को रद्द करने की मांग पर सहमति बन गई है।
इन सभी बिंदुओं को लेकर जांच टीम ने एक्शन कमेटी से लिखित में देने का आग्रह किया है, ताकि बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। परिवार और कमेटी के फैसले के बाद ही इस मामले में अगला कदम उठाया जाएगा।
मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को 5 दिन की CBI रिमांड
मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को मोहाली स्थित CBI अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े सबूतों और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इससे पहले गुरुवार को CBI की अलग-अलग टीमों ने अश्विनी कुमार और उसके साथी विपिन कुमार के घरों पर करीब आठ घंटे तक तलाशी अभियान चलाया था। जांच टीम ने श्मशान घाट रोड स्थित मानसा मेडिकल हॉल की भी जांच की और आसपास के दुकानदारों से पूछताछ की। दूसरी ओर, अदालत ने इस हत्याकांड के चारों आरोपियों को 5 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी अब तलाशी के दौरान मिले साक्ष्यों और पूछताछ से सामने आने वाली जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
पंजाब फार्मेसी काउंसिल ने अश्विनी कुमार का रजिस्ट्रेशन रद्द किया
हत्याकांड के मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार के खिलाफ पेशेवर स्तर पर भी कार्रवाई हुई है। पंजाब फार्मेसी काउंसिल की कार्यकारी कमेटी ने 20 अक्टूबर को हुई बैठक में उसका फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन रद्द करने का फैसला लिया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को रजिस्ट्रार ने इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी किया। काउंसिल के रिकॉर्ड के मुताबिक, अश्विनी कुमार का रजिस्ट्रेशन नंबर 51464 था, जिसे 10 जुलाई 2020 को जारी किया गया था। रजिस्ट्रेशन रद्द करने का आदेश 20 अक्टूबर से प्रभावी है। इसके तहत उसका नाम पंजीकृत फार्मासिस्टों के आधिकारिक रजिस्टर से हटा दिया गया है। अब मामले में सबकी नजर एक्शन कमेटी की बैठक और पोस्टमॉर्टम पर होने वाले फैसले पर है। सरकार की ओर से 12 मांगें स्वीकार किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री और DGP के इस्तीफे की मांग पर गतिरोध बना हुआ है। CBI की जांच और अदालत की अगली कार्रवाई भी मामले की दिशा तय करने में अहम होगी।














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