चंडीगढ़.
पंजाब सरकार आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में बेअदबी संबंधी कानून में संशोधन पर चर्चा करने जा रही है। यह संशोधन श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा सुझाए गए सुझावों के आधार पर किया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकार ने एडवोकेट जनरल से कानूनी राय मांगी है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को चंडीगढ़ में कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि एडवोकेट जनरल कार्यालय से कानूनी राय मिलने के बाद मानसून सत्र में प्रस्तावित संशोधन पर चर्चा की जाएगी। मंत्रिमंडल ने तीन से 10 अगस्त तक मानसून सत्र बुलाने के लिए सहमति दी है, और आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है। साथ ही, निजी स्कूलों की फीस से संबंधित अध्यादेश को भी विधानसभा में पेश किया जाएगा। राज्य सरकार ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026 में संभावित बदलाव को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के साथ भी बातचीत की है।
एसजीपीसी और एडवोकेट जनरल कार्यालय के समन्वय से कानूनी संशोधन का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा सभी सिख विधायकों को तलब करने के बाद सरकार को कानून के अलग-अलग प्रविधानों में लगभग 10 संशोधन सुझाए गए थे।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण मांग श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 'कस्टोडियन' से जुड़े सभी प्रविधानों को हटाने की है। इसके अतिरिक्त, गुरु ग्रंथ साहिब की बीड़ों का केंद्रीय रजिस्टर तैयार करने, उनका विवरण आनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने और प्रत्येक बीड़ को अलग पहचान संख्या देने के प्रविधान का विरोध किया गया है। श्री अकाल तख्त साहिब ने यह भी सुझाव दिया है कि भविष्य में इस कानून के तहत कोई भी नियम या संशोधन लागू करने से पहले एसजीपीसी और अकाल तख्त से अनिवार्य रूप से सलाह और मंजूरी ली जाए। अब एडवोकेट जनरल की कानूनी राय के बाद सरकार श्री अकाल तख्त साहिब के सभी सुझावों पर अंतिम निर्णय लेगी।
प्रविधान और श्री अकाल तख्त की आपत्ति
प्रविधान: बीड़ और बीड़ां शब्द के स्थान पर स्वरूप और स्वरूपों शब्दों को प्रयोग होगा।
आपत्ति : बीड़ शब्द सिख रहित मर्यादा में पुरातन समय से प्रचलित है। कानून में इस शब्द को हटाना सरकार की सिख रिवायतों के प्रति असंवेदनशीलता है। सरकार बीड़ और बीड़ां शब्द को ही शामिल करे।
प्रस्ताव : सरकार सुझाए गए शब्दों को शामिल करेगी।
प्रविधान : 2008 के पंजाब एक्ट नंबर 21 की धारा 2 में कस्टोडियन शब्द जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि जिस व्यक्ति, संस्था, गुरुद्वारा कमेटी जिसके पास श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप है, वह उसकी सुरक्षा व सिख मर्यादा का पालन करने का जिम्मेदार होगा।
आपत्ति : श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हमारे कस्टोडियन हैं, कोई व्यक्ति कैसे उनका कस्टोडियन हो सकता है। इसे हटाया जाए।
प्रस्ताव – नए संशोधन में कस्टोडियन शब्द को हटाकर इसके स्थान पर नया उपयुक्त कानूनी शब्द प्रस्तावित करने को कहा गया है। साथ ही उसकी सरल व्याख्या भी शामिल करने को कहा गया है ताकि उसका गलत उपयोग न हो सके।
प्रविधान : स्वरूपों के लिए एसजीपीसी एक केंद्रीय रजिस्टर रखेगी। स्वरूपों की छपाई, संरक्षण, वितरण तथा उपलब्ध कराने का रिकार्ड फिजिकल और इलेक्ट्रानिक दोनों रूपों में होगा और यह एसजीपीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा। इसी तरह प्रत्येक स्वरूप के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी।
आपत्ति – श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप (बीड़) को विशिष्ट पहचान संख्या देना मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ के समान है। इसे खालसा पंथ स्वीकार नहीं करेगा।
प्रस्ताव – इस प्रविधान को हटा दिया जाएगा।
प्रविधान – धारा 3बी(1) केवल उन व्यक्तियों के कर्तव्य और जिम्मेदारियां निर्धारित करती है, जिनके पास श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बीड़ अथवा गुरबाणी की सैंची, पोथी या गुटका साहिब मौजूद हैं।
आपत्ति – यह प्रविधान सीधे तौर पर श्री अकाल तख्त साहिब के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करता है। इसलिए संशोधन कानून की धारा 3बी(1) को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
प्रस्ताव – इस प्रविधान को हटा दिया जाएगा
प्रविधान- वर्ष 2008 के पंजाब अधिनियम 21 की धारा 5 बदलने के संबंध में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप अथवा स्वरूपों की बेअदबी को छोड़ अन्य अपराध करने वाले को अधिकतम पांच वर्ष तक का कारावास तथा दस लाख रुपये तक का जुर्माना।
आपत्ति : यह स्वीकार्य नहीं है। इन मामलों में निर्णय व कार्रवाई का अधिकार केवल श्री अकाल तख्त साहिब का है।
प्रस्ताव – बेअदबी और मर्यादा का पालन न होने की व्याख्या की जाएगी। मर्यादा तय करना व उसका पालन, पंथ व श्री अकाल तख्त साहिब का अधिकार क्षेत्र है।
















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