राज्य महिला आयोग में छह साल बाद शुरू हुई सुनवाई के दौरान मौजूद महिला शिकायतकर्ता।
एमपी में छह साल बाद राज्य महिला आयोग में सुनवाई शुरू हो गई है। आयोग में जनवरी 2026 की स्थिति में 30 हजार शिकायतें पेडिंग थीं। आयोग की पहली सुनवाई में आज 40 मामलों में सुनवाई की गई है। आज हुई सुनवाई में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य स
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छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर महिला आयोग में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए जनसुनवाई का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष रेखा यादव एवं सदस्य साधना स्थापक की संयुक्त बेंच ने घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मामलों पर संज्ञान लिया।
महिला आयोग कार्यालय में हुई सुनवाई के पहले दिन भोपाल जिले के लगभग 40 प्रकरण बेंच के समक्ष पेश किए गए। इस दौरान आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों ने एक-एक कर आवेदिकाओं की शिकायतें सुनीं और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बेटी से नहीं मिलने देने, एक करोड़ के लेन देन के मामले
जनसुनवाई के दौरान पेचीदा और गंभीर पारिवारिक विवाद के मामले सामने आए। एक प्रकरण में आवेदिका ने शिकायत दर्ज कराई कि विवाह के बाद से ही उसे अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा है।
ससुराल पक्ष द्वारा बेटी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, वहीं पेशे से अधिवक्ता दामाद द्वारा कथित रूप से बेटी के माध्यम से उसके मायके पक्ष के विरुद्ध झूठी शिकायतें दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी मामले में आवेदिका की बहू पर भी ससुराल पक्ष के खिलाफ घरेलू हिंसा की झूठी शिकायत दर्ज कराने का दबाव बनाने और इसके बदले में एक करोड़ रुपये के लेन-देन की बात भी सामने आई। पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्थानीय प्रशासन के सहयोग से त्वरित निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए।
इसी तरह घरेलू हिंसा से जुड़े एक अन्य मामले में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विपक्षी दल द्वारा आवेदिका को पूर्व में ही समझौता राशि प्रदान की जा चुकी है और बच्ची के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उसके नाम पर एक प्लॉट की रजिस्ट्री भी की गई है।
इसके बावजूद आवेदिका द्वारा भरण-पोषण के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता की मांग की जा रही थी। इस मामले में भी संयुक्त बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

24 मार्च से रिक्त बताए थे सरकार ने आयोग के सभी पद
वर्ष 2020 में मार्च महीने में कमलनाथ सरकार में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा नियुक्त की गई थी। उनकी नियुक्ति के एक हफ्ते के भीतर कमलनाथ सरकार गिर गई थी और शिवराज सिंह चौहान फिर सीएम बने थे।
विधानसभा में इस साल बजट सत्र के दौरान महिला आयोग में पेंडिंग शिकायतों और रिक्त पदों की जानकारी मांगी गई थी जिसका जवाब में मंत्री कृष्णा गौर ने बताया था कि मध्यप्रदेश महिला आयोग में बीते 31 जनवरी 2026 तक 30 हजार पांच सौ 24 मामले पेंडिंग थे।
मध्यप्रदेश महिला आयोग में एक अध्यक्ष के अलावा पांच सदस्यों के पद मंजूर हैं। ये सभी पद 24 मार्च 2020 से इसी महीने हुई नियुक्तियों के पहले तक रिक्त थे।















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