कारगिल विजय दिवस पर राज्यपाल बागड़े बोले, वीरों का बलिदान राष्ट्र का अमर गौरव है

 जयपुर
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता, अखंडता एवं संप्रभुता की रक्षा के लिए भारतीय सैनिकों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान, अदम्य साहस और अटूट राष्ट्रनिष्ठा को कृतज्ञतापूर्वक नमन करने का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सेना द्वारा संचालित 'ऑपरेशन विजय' विश्व के सबसे कठिन सैन्य अभियानों में से एक था, जिसमें कारगिल, द्रास एवं बटालिक की दुर्गम एवं बर्फाच्छादित चोटियों पर पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों के कब्जे से सामरिक महत्व के क्षेत्रों को भारतीय सैनिकों ने उत्कृष्ट सैन्य रणनीति, अनुशासन, अदम्य मनोबल और अप्रतिम पराक्रम के बल पर पुनः राष्ट्र के अधिकार में स्थापित किया। यह विजय केवल रणभूमि की सफलता नहीं, बल्कि भारतीय सेना की रणनीतिक दक्षता, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति का विश्व पटल पर गौरवपूर्ण उद्घोष भी थी।

राज्यपाल बागडे रविवार को कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में क्रीड़ा भारती, जोधपुर प्रांत द्वारा मेहरानगढ़ फोर्ट की तलहटी स्थित रावटी-घोड़ा घाटी में आयोजित 'ऑपरेशन विजय कारगिल-2026' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ने कहा कि भारतीय सेना साहस, अनुशासन, सेवा और बलिदान की जीवंत प्रतीक है। हमारे वीर जवान तपते मरुस्थलों से लेकर हिमालय की दुर्गम बर्फीली चोटियों तथा समुद्री सीमाओं तक प्रत्येक परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित भाव से कर्तव्य निर्वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान सदियों से शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की भूमि रहा है। बप्पा रावल, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप, मेजर शैतान सिंह तथा कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह जैसे अमर वीरों की गौरवशाली परम्परा आज भी राष्ट्रसेवा का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के अद्वितीय सैन्य कौशल, दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्र प्रथम की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन संगठन शक्ति, सुशासन, साहस और राष्ट्रनिष्ठा का कालजयी आदर्श है, जिससे प्रेरणा लेकर युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस प्रत्येक नागरिक में राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़ करने का अवसर है। यह दिवस केवल वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, त्याग और राष्ट्रभक्ति को आत्मसात कर विकसित, सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का भी प्रेरक अवसर है।

कार्यक्रम के दौरान कारगिल युद्ध में भारतीय सेना द्वारा संचालित टाइगर हिल अभियान सहित प्रमुख सामरिक चोटियों पर हुए संघर्ष का सांकेतिक एवं नियंत्रित पुनर्प्रस्तुतीकरण किया गया। रावटी-घोड़ा घाटी की प्राकृतिक पहाड़ियों को कारगिल की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के स्वरूप में रूपांतरित कर युद्ध की परिस्थितियों, सैन्य रणनीति, सैनिकों के साहस, शौर्य और विजय अभियान का प्रभावशाली मंचन किया गया। प्रस्तुतीकरण ने उपस्थित जनसमूह को कारगिल युद्ध के कठिन संघर्ष, भारतीय सेना की अद्वितीय वीरता तथा राष्ट्र रक्षा के प्रति उनके सर्वोच्च समर्पण का सजीव अनुभव कराया।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा आयोजन समिति के अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च समर्पण का अमर अध्याय है। समुद्र तल से लगभग 16 से 17 हजार फीट की ऊंचाई, शून्य से नीचे तापमान तथा अत्यंत विषम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने दुश्मन के सामरिक लाभ को निष्प्रभावी बनाते हुए कारगिल की चोटियों पर पुनः तिरंगा फहराकर देश के सम्मान और गौरव को अक्षुण्ण रखा।

कार्यक्रम में कारगिल युद्ध में असाधारण शौर्य एवं वीरता का परिचय देने वाले 16 वीर सैनिकों तथा वीरांगनाओं का राज्यपाल हरिभाऊ बागडे एवं केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत द्वारा सम्मान किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *