सितंबर का महीना ग्रहों की चाल और नक्षत्रों के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है. इस माह कर्मफलदाता और न्याय के देवता शनि देव 3 मुख्य राशियों मिथुन, सिंह और कन्या के जातकों के धैर्य, निर्णय क्षमता और योग्यता की कड़ी परीक्षा ले सकते हैं.
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सितंबर में शनि देव की दृष्टि सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्यदेव पर और मिथुन व कन्या राशि के स्वामी ग्रह बुध देव पर पड़ेगी. ग्रहों के इस प्रभाव के कारण इन तीनों ही राशियों के जीवन में उथल-पुथल और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. शनि देव कर्म प्रधान ग्रह हैं, इसलिए इस दौरान ईमानदारी और लगन से किए गए कार्यों का तो उत्तम फल मिलेगा, लेकिन भाग्य के भरोसे बैठकर आलस्य करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. आइए जानते हैं कि सितंबर महीने में इन तीनों राशियों पर शनि देव का कैसा असर रहने वाला है.
मिथुन राशि (Gemini)
मिथुन राशि के स्वामी ग्रह बुध पर शनि की दृष्टि रहने से इस माह आपको मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श में संयम रखें. जल्दबाजी में लिया गया कोई भी व्यावसायिक निर्णय भारी पड़ सकता है.
सावधानी: अपनी योग्यता पर भरोसा रखें और शॉर्टकट अपनाने से बचें. जितने अधिक प्रयास आप खुद करेंगे, सफलता उतनी ही मजबूत मिलेगी.
सिंह राशि (Leo)
सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं, और सूर्य-शनि के बीच ज्योतिषीय शत्रुता मानी जाती है. ऐसे में सिंह राशि वालों के लिए यह समय धैर्य की परीक्षा का रहेगा. कार्यस्थल पर आपके काम का बोझ बढ़ सकता है और सीनियर के साथ तालमेल बिठाने में मशक्कत करनी पड़ सकती है. मान-सम्मान को लेकर थोड़ा सजग रहें.
सावधानी: अहंकार से दूर रहें. अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ें और भाग्य के भरोसे कोई नया जोखिम न लें.
कन्या राशि (Virgo)
कन्या राशि के स्वामी बुध पर शनि की दृष्टि के चलते इस माह आपके दैनिक कार्यों और योजनाओं में कुछ रुकावटें या देरी देखने को मिल सकती है. धन के मामलों में सोच-समझकर कदम उठाएं. फिजूलखर्ची से बचें और सेहत का विशेष ध्यान रखें.
सावधानी: आलस्य को खुद पर हावी न होने दें. शनि देव आपकी निरंतरता (Consistency) की परीक्षा लेंगे, इसलिए अपने लक्ष्यों पर टिके रहें.
शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के सरल उपाय
– शनिवार को दान: हर शनिवार को काले तिल, उड़द की दाल या सरसों के तेल का दान करें.
– पीपल पूजन: शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
– हनुमान जी की उपासना: प्रतिदिन या हर मंगलवार-शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें, इससे शनि देव के कष्टों से मुक्ति मिलती है.















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