संसद में राहुल गांधी के ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ वाले बयान पर बवाल, हंगामे के बाद रिकॉर्ड से हटाए गए शब्द

नई दिल्ली:

लोकसभा में एंटी पेपर लीक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि छात्रों का गुस्सा जायज था। देश के युवाओं का सम्मान हो, वो सम्मान चाहते हैं। छात्रों के प्रदर्शन में नफरत या गुस्सा नहीं था। यही युवा हमारा भविष्य संवारेंगे। ऐसे में युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए चर्चा जरूरी है। बीजेपी नेताओं को ये बात समझनी चाहिए।

राहुल गांधी ने इस दौरान स्टूडेंट, इंडियट के साथ ही तीसरी कैटेगरी अंधभक्त का जिक्र किया। नेता प्रतिपक्ष के इतना कहते ही हंगामा शुरू हो गया। किरेन रिरिजू ने इसे सदन की कार्यवाही से हटाने की अपील की, जिसके बाद स्पीकर ने इसे हटा दिया। इसके बाद राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर ऐसा कमेंट किया जिस पर हंगामा हो गया।

राहुल गांधी बोले- देश के भविष्य ने हमारी सड़कों पर क्या किया
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि मैं बहुत उत्साहित था और इस बात से आश्वस्त था कि देश के भविष्य ने हमारी सड़कों पर क्या किया। यह गुस्सा, हिंसा या नफरत नहीं थी। यह देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ी की भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति थी। मुझे लगता है कि सभी राजनीतिक दलों को, जिसमें BJP के मेरे साथी भी शामिल हैं, इस भावना का सम्मान करना चाहिए। मुझे पूरा यकीन है कि अगर बीजेपी के मेरे साथी अपने बच्चों से पूछें कि उनके भाई-बहन जो कर रहे थे, उसके बारे में वे क्या सोचते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों का भी समर्थन ही मिलेगा। जो हुआ है उसमें कुछ भी गलत नहीं है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए।

‘अंधभक्त’ और ‘इडियट’ शब्दों पर शुरू हुआ विवाद
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रख रहे थे. उन्होंने नीट परीक्षा, छात्रों के आंदोलन और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि आज देश के युवा परीक्षा व्यवस्था को लेकर परेशान हैं. उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी आवाज को सुना जाना चाहिए. इसी दौरान राहुल गांधी ने एक छात्रा से हुई बातचीत का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि छात्रा ने ऐसे लोगों के लिए ‘इडियट (Idiot)’ शब्द का इस्तेमाल किया, जो यह मानते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है और वे कुछ नया सीखना नहीं चाहते. इसके अलावा राहुल गांधी के भाषण में ‘अंधभक्त’ और ‘बेवकूफ’ जैसे शब्दों का भी जिक्र आया. इन्हीं शब्दों को लेकर सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई और सदन में हंगामा शुरू हो गया। 

हंगामे के बीच राहुल गांधी ने जोड़े हाथ
राहुल गांधी लगातार अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन सत्ता पक्ष के सांसद उनके बयान पर विरोध जता रहे थे. सदन में शोर बढ़ने लगा तो राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की तरफ देखा. इसके बाद उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, “सर, अगर आप चाहते हैं कि इस देश में सिर्फ बीजेपी बोले तो मैं चुप होकर यहां बैठ जाता हूं. मैं बैठ जाता हूं, कोई प्रॉब्लम नहीं है. टाइम बता दीजिए, कितना समय ले लिया.” राहुल गांधी के इस बयान के बाद सदन का माहौल और गरमा गया. सोशल मीडिया पर भी उनका यह वीडियो तेजी से वायरल होने लगा. लोग इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देने लगे। 

सदन में किया इडियट और अंधभक्त का जिक्र, मचा हंगामा
राहुल गांधी ने आगे कहा कि हालात ऐसे बने कि प्रोटेस्ट के लिए छात्रों को उतरना पड़ा। दुनिया कैसे बदल रही, युवा समझ रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों पर देश को गर्व है। इसी दौरान राहुल गांधी ने अंध भक्त का जिक्र किया, जिसे लेकर सदन में हंगामा शुरू हो गया। उन्होंने सदन में एक लड़की का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने उनसे पूछा कि अंधभक्त को आप कहां रखना चाहेंगीं। इसी के बाद विवाद हुआ।

मैं जब बोलता हूं तो सत्तापक्ष चिल्लाने लगता है: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने जैसे ही अंध भक्त शब्द का जिक्र किया, सत्ता पक्ष की ओर से सवाल उठाए गए। किरेन रिजिजू सामने आए, उन्होंने कहा कि ये शब्द असंसदीय है। उन्होंने स्पीकर से इसे सदन की कार्यवाही से हटाने की भी अपील कर दी। रिजिजू ने कहा कि इस शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति है। उधर राहुल गांधी ने कहा कि मैं जैसे ही बोलता हूं सदन में हंगामा होने लगता है। जैसे ही मैं बोलता हूं रिजिजू खड़े हो जाते हैं। राहुल गांधी ने ये भी कहा कि क्या देश में सिर्फ बीजेपी बोलेगी? हालांकि, सदन से असंसदीय शब्द हटाए जाने के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।

राहुल गांधी बोले- प्रधान नहीं, आरएसएस छात्रों की दुश्मन
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एग्जाम का पूरा सिस्टम वसूली से भरा है। शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस का कब्जा है। हर बड़े पद पर आरएसएस को लोग बैठे हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने कभी शिक्ष मंत्रालय को चलाया ही नहीं। धर्मेंद्र प्रधान आरएसएस के मुखौटा थे। छात्रों ने साहस से आरएसएस का सामना किया। प्रधान नहीं, आरएसएस छात्रों की दुश्मन है। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम बहुत खराब और क्रूर है। हर चीज का निजीकरण किया जा रहा है। यह जबरन वसूली का सिस्टम है, यह बहुत बेरहम और खराब सिस्टम है।

राहुल बोले- धर्मेंद्र तो बस एक चेहरा हैं…
राहुल गांधी ने आगे कहा कि इस सिस्टम की आत्मा पर RSS का कब्जा हो गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि हम UPA नहीं हैं, हमारे मंत्री कभी इस्तीफा नहीं देते। वे सही कह रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिखावटी है क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान ने कभी शिक्षा मंत्रालय नहीं चलाया। शिक्षा मंत्रालय को चलाने वाला संगठन RSS है। इसे चलाने वाला व्यक्ति मंत्री के ऑफिस में बैठा OSD है तो, छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में छात्र बने रहने, अपने जुनून को फॉलो करने, अपनी बात कहने और अपने मन के सवाल पूछने की इजाजत नहीं है। उन्हें RSS की मनगढ़ंत और बेतुकी हिस्ट्री को मानना पड़ता है। धर्मेंद्र प्रधान तो बस एक चेहरा हैं, असली दुश्मन RSS है। वे ही लोग हैं जो चाहते हैं कि आप 'अंधभक्त' बनें।

'गृह मंत्री ने छात्रों को पीटने के आदेश दिए', राहुल गांधी के आरोप पर घमासान
राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि गृह मंत्री के पास यहां बैठने का साहस नहीं है। गृह मंत्री का नाम लेते ही फिर से हंगामा शुरू हो गया। राहुल गांधी ने कहा कि चर्चा के दौरान गृह मंत्री सदन में मौजूद क्यों नहीं हैं। गृह मंत्री को सदन में आने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री के आदेश पर ही छात्रों के ऊपर फायरिंग की गई। उन्होंने ही छात्रों के पीटने के आदेश दिए। राहुल गांधी के आरोप लगाते हुए किरेन रिजिजू ने पलटवार कर दिया।

किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से की माफी की मांग, सदन में हंगामा
किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से इस आरोप को लेकर माफी की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ऐसा कैसे कह सकते हैं कि गृह मंत्री ने छात्रों को पीटने के आदेश दिए। किस आधार पर नेता प्रतिपक्ष ने गृह मंत्री को लेकर कमेंट किया। राहुल गांधी बयान पर ब्यौरा दें। रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को इस टिप्पणी के लिए माफी मांगनी होगी। गृह मंत्री को लेकर राहुल गांधी का बयान गलत है। स्पीकर ने भी राहुल गांधी को नसीहत दी कि बिना तथ्यों के किसी पर आरोप नहीं लगाएं।

लोकसभा में बुधवार को भी नहीं चला प्रश्नकाल
इससे पहले संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे के कारण बाधित है। बुधवार को भी संसद की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा में हंगामा खड़ा हो गया। प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष की तरफ से नारेबाजी के कारण बाद में सदन को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बुधवार सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर स्पीकर ओम बिरला ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदक विजेताओं को बधाई दी।

स्पीकर की अपील 'प्रश्नकाल की कार्यवाही चलने दें'
इसके बाद, स्पीकर ने प्रश्नकाल की कार्यवाही का संचालन किया। हालांकि, जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष ने नारेबाजी बंद नहीं की।

विपक्ष का हंगामा जारी
विपक्ष के हंगामे पर ओम बिरला ने कहा कि मैं आपसे आग्रह करता हूं कि प्रश्नकाल के दौरान कभी भी प्रश्नकाल को बाधित न करें। प्रश्नकाल संसद सदस्यों के लिए होता है और सरकार की जवाबदेही तय होती है। कई सदस्यों ने मुझसे मिलकर आग्रह भी किया कि प्रश्नकाल चलने दिया जाए। आप (विपक्ष) संसद सदस्यों के हक को नहीं मार सकते हैं।

विपक्ष को हर मुद्दे पर बोलने का समय दिया: बिरला
स्पीकर ने कहा कि मैंने विपक्ष को हर मुद्दे और विषय पर बोलने का प्राप्त समय दिया है, लेकिन इस तरीके से सदस्यों के प्रश्नकाल के समय को बाधित न करें। यह बिल्कुल उचित नहीं है। मैं फिर से आग्रह करता हूं कि सभी सदस्य अपनी सीटों पर जाकर बैठें और प्रश्नकाल के बाद चर्चा में हिस्सा लें।

विपक्ष के सदस्यों से स्पीकर ओम बिरला ने आगे कहा कि आप सदन को बाधित करना चाहते हैं और नियोजित तरीके से गतिरोध पैदा करना चाहते हैं, जो संसदीय परंपराओं को अनुसार नहीं है। इसके बावजूद विपक्ष के सदस्य अपनी सीटों पर नहीं लौटे और हंगामा जारी रहा। बाद में स्पीकर ओम बिरला ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
रुचिर शुक्ला

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