नई दिल्ली
मिडिल ईस्ट में तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार आठवीं रात भी भीषण बमबारी की है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन सटीक हमलों में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार, समुद्री ठिकान, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइटों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरान समर्थित हमले के जवाब में की गई, जिसमें दो अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सिर्फ शुरुआत है और अमेरिका अब पूर्ण पैमाने पर सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है।
अलर्ट मोड में 50000 सैनिक
इस बीच द जेरूसलम पोस्ट की स्पेशल रिपोर्ट के हवाले से पता चला है कि मिडिल ईस्ट में तैनात 50000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखा गया है। रिपोर्ट में CENTCOM कमांड के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए सैनिकों को किसी भी क्षण बड़े क्षेत्रीय संघर्ष के लिए तैयार रहने का सख्त निर्देश दिया गया है। ये सैनिक पहले से ही विभिन्न ठिकानों पर तैनात हैं और अब उन्हें अतिरिक्त हथियार, गोला-बारूद और लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह अलर्ट स्तर पिछले कई वर्षों में सबसे ऊंचा है।
अमेरिका ने एयर पावर को दी भारी मजबूती
अमेरिकी रक्षा विभाग ने क्षेत्र में अपनी हवाई क्षमता को और मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। जर्मनी के स्पैंगडाहलेम एयर बेस से F-16 फाइटर जेट्स को तेजी से मध्य पूर्व भेजा जा रहा है। साथ ही, यूनाइटेड किंगडम से उन्नत F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट्स को भी तैनाती के लिए तैयार किया गया है। ये दोनों ही विमान इजरायल और क्षेत्र के अन्य प्रमुख अमेरिकी व एलाइड सैन्य बेस पर पहुंचाए जा रहे हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों के लिए अमेरिका इजराइल को अतिरिक्त एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भी उपलब्ध करा रहा है, जो युद्ध की स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं
अमेरिकी नागरिकों के लिए एडवाइजरी
अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने सुरक्षा एडवाइजरी को और विस्तार देते हुए दुनिया भर के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। एडवाइजरी में विदेश यात्रा कर रहे या विदेश में रह रहे सभी अमेरिकी नागरिकों से अत्यधिक सतर्क रहने और जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा गया है। विभाग ने खासतौर पर चेतावनी दी है कि ईरान समर्थित आतंकी समूह न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी अमेरिकी हितों, दूतावासों और नागरिकों को निशाना बना सकते हैं। इस एडवाइजरी के बाद कई देशों में अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक यात्राएं टालें और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों से संपर्क बनाए रखें
इजरायल भी है अलर्ट पर
जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, इजरायल अमेरिका-ईरान के बीच तेजी से बदल रही घटनाओं पर पूरी नजर रखे हुए है। लगातार आठ रातों के अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने अब तक इजरायल को सीधे निशाना बनाने से परहेज किया है, लेकिन इजरायली अधिकारियों का आकलन है कि यह स्थिति बहुत जल्द बदल सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने इजरायल को फिलहाल मौजूदा लड़ाई से अलग रहने की सलाह दी है। सूत्रों के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वॉशिंगटन ने इसे अभी स्वीकार नहीं किया है।
इजरायली सेना के उच्चाधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने इजरायल पर प्रत्यक्ष हमला किया तो इजरायली वायुसेना तेहरान समेत ईरान के अंदरूनी ठिकानों पर भारी हमले कर सकती है। साथ ही, अगर अमेरिका ने इजरायल की भागीदारी को मंजूरी दे दी तो इजरायल उन सभी लक्ष्यों पर दोबारा हमले शुरू कर सकता है जो पिछले संघर्षविराम से पहले अधूरे रह गए थे। इनमें ईरान के परमाणु सुविधाएं, मिसाइल फैक्टरियां और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे शामिल हो सकते हैं।
क्या है ट्रंप प्रशासन का प्लान?
दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि ये सभी कदम ट्रंप प्रशासन की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति का हिस्सा लगते हैं। अमेरिका का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को बुरी तरह कमजोर करना, उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना और क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों खासकर इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। माना जा रहा है कि अगर अमेरिका कोई भी बड़ा कदम उठाता है को पूरे मिडिल ईस्ट को बड़े युद्ध की आग में झोंक सकता है।















Leave a Reply