योगी बोले- विमुक्त समुदाय स्वतंत्रता संग्राम के नायक, घुमंतू विकास बोर्ड देगा नई पहचान

लखनऊ
 कभी अंग्रेजों की नजर में ''क्रिमिनल ट्राइब'' घोषित कर दमन का शिकार बनाए गए विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम का असली नायक बताया है।

घुमंतू विकास बोर्ड के गठन पर आयोजित आभार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने इन समुदायों को कानूनी सम्मान दिलाया, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इनके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पुनर्सम्मान के लिए ठोस पहल हुई है। सरकार का उद्देश्य इन समुदायों को केवल योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि उनके गौरवशाली इतिहास को भी उचित पहचान दिलाना है।

मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित आभार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने जिन घुमंतू जातियों को वर्ष 1871 के ''क्रिमिनल ट्राइब एक्ट'' के तहत अपराधी घोषित किया था, वे वास्तव में भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले समुदाय थे। स्वतंत्र भारत में बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर ने इस कानून को समाप्त कर उन्हें ''विमुक्त जाति'' का सम्मान दिलाया, लेकिन उनके समग्र विकास के लिए अपेक्षित प्रयास लंबे समय तक नहीं हुए।

सरकारी योजनाओं के दायरे में लाने का किया काम
योगी ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री ने पहली बार इन समुदायों के लिए आयोग का गठन किया और अब प्रदेश सरकार ने घुमंतू विकास बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है। सरकार ने वनटांगिया गांवों को पहली बार राजस्व गांव का दर्जा दिलाया, मुसहर समाज को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा और थारू, बुक्सा, गोंड, चेरो, कोल, सहरिया सहित अनेक उपेक्षित समुदायों को सरकारी योजनाओं के दायरे में लाने का कार्य किया।

सपेरा समाज के लिए कहा कि यह समुदाय प्राचीन काल से शिवावतारी गुरु श्री गोरखनाथ जी की परंपरा का अनुयायी रहा है। विदेशी आक्रमणों के समय जब संचार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे, तब यही समाज भजन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के माध्यम से लोगों को सचेत करता था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर कहते हैं कि जिन्हें कांग्रेस और सपा ने कभी नहीं पूछा, उन्हें हमारी सरकार ने सम्मान दिया

श्रृंगवेरपुर में निषादराज गुह्य की प्रतिमा की स्थापना, बहराइच में महाराजा सुहेलदेव विजय स्मारक का निर्माण और बलरामपुर के इमिलिया कोडर में ट्राइबल म्यूजियम की स्थापना इसी सोच का परिणाम है। सोनभद्र और मीरजापुर में भी जनजातीय संग्रहालय स्थापित किए जा रहे हैं।

अनुसूचित जाति, जनजाति और घुमंतू समाज के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था की गई है। श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय खोले गए हैं, जबकि स्ट्रीट वेंडर्स, श्रमिकों और छात्रों के लिए भी अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

''घुमंतू'' समाज अब बन रहा है ''टिकंतू'' : असीम अरुण
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि यह बोर्ड विभिन्न विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को विमुक्त एवं घुमंतू समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सेतु बनेगा और उनके जीवन में व्यापक परिवर्तन लाएगा।

उन्होंने कहा कि आज परिवर्तन इतना स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि लोग कहने लगे हैं, यह समाज अब ''घुमंतू'' नहीं, ''टिकंतू'' हो रहा है। इनके पास अपना घर, बिजली, आजीविका के साधन और सम्मान के साथ आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

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