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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में बैंक के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार ने समय पर आवेदन किया है, तो सिर्फ ‘पद खाली नहीं है’, कहकर नियुक्ति से इनकार करना सही नहीं है। इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बैंक के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही, याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर नौकरी देने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने “संतोष सिन्हा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक” मामले में दिया है। अब जानिए पूरा मामला मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि याचिकाकर्ता के पिता बैंक में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर काम करते थे और सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद सिर्फ दो महीने के भीतर ही याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दे दिया था। लेकिन बैंक ने इस मामले को लंबे समय तक लटकाए रखा और बाद में यह कहकर नियुक्ति देने से मना कर दिया कि उस समय कोई पद खाली नहीं था। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि याचिकाकर्ता के पिता की नौकरी के दौरान ही मौत हो गई थी, जिससे घर की आर्थिक हालत खराब हो गई थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने समय रहते अनुकंपा नौकरी के लिए आवेदन कर दिया था। उन्होंने यह भी बताया कि बैंक ने इस मामले को सालों तक लटकाए रखा, जबकि ऐसे ही दूसरे मामलों में लोगों को नौकरी दे दी गई थी। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि बैंक अपनी ही अनुकंपा नियुक्ति की नीति के खिलाफ काम कर रहा है। इस नीति में साफ लिखा है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए और मृतक कर्मचारी के परिवार को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ तकनीकी वजहें या प्रशासनिक बहाने बनाकर किसी परिवार को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब कर्मचारी की मौत के बाद पद खाली हो चुका था और आवेदन भी समय पर दे दिया गया था। सुनवाई के दौरान अनादि शर्मा ने कहा कि बैंक का यह कहना कि “कोई पद खाली नहीं है”, सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बात न तो तथ्यों के अनुसार ठीक है और न ही बैंक की नीति के मुताबिक। ऐसे संवेदनशील मामलों में इस तरह का रवैया जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के अनुरूप नहीं माना जा सकता। कर्मचारी की मृत्यु के साथ पद रिक्त माना जाएगा एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि जब कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई, तो उसी समय उसका पद खाली हो गया माना जाएगा। चूंकि याचिकाकर्ता ने तय समय के भीतर आवेदन कर दिया था, इसलिए बाद में यह कहना कि पद खाली नहीं है, सही नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का मकसद यह होता है कि किसी कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को तुरंत आर्थिक सहारा मिल सके। ऐसे मामलों में संस्थानों को संवेदनशील और मानवीय तरीके से फैसला लेना चाहिए। कोर्ट ने बैंक के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर नौकरी दी जाए। अनुकंपा नियुक्ति पर बैंक का आदेश रद्द हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बैंक का 30 सितंबर 2022 का फैसला रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर किसी भी उपलब्ध चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-4) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
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अनुकंपा नियुक्ति मामला…90 दिन में नौकरी देने के निर्देश:हाईकोर्ट बोला- 'पद खाली नहीं' कहकर राहत नहीं रोकी जा सकती, बैंक का आदेश किया रद्द















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