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उज्जैन में शनिवार को निजी क्लीनिक में अपेंडिक्स के इलाज के दौरान 11 वर्षीय छात्रा की मौत के मामले में नीलगंगा पुलिस ने बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. देवेश तिवारी और क्लीनिक संचालक राजेश चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। उज्जैन की मंछामन कॉलोनी स्थित जनसेवा नोबल पाली क्लीनिक में महिदपुर तहसील के ग्राम तीलियां खेड़ी निवासी मेहरबान सिंह की 11 वर्षीय बेटी दिव्या सूर्यवंशी का यहां इलाज चल रहा था। दिव्या कक्षा 7वीं की छात्रा थी। क्लीनिक बंद मौके से फरार हो गया था स्टॉफ शनिवार 9 मई को सुबह 11 बजे दिव्या को ऑपरेशन के लिए क्लीनिक में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, शाम 5 बजे उसे फ्रीगंज स्थित अपना हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि क्लीनिक बंद कर डॉक्टर और स्टाफ मौके से चले गए। इसके बाद परिजनों ने शव सड़क पर रखकर धरना प्रदर्शन कर आरोपी डॉक्टर पर कार्यवाही की मांग की थी। सूचना मिलने पर नीलगंगा थाना पुलिस सीएसपी श्वेता गुप्ता और एसडीएम एल.एन. गर्ग भी घटनास्थल पर पहुंचे। बाद में सीएमएचओ अशोक पटेल को बुलाया गया, जिन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सील कर दिया और मामले की जांच के निर्देश दिए थे। दोनों आरोपी को कोर्ट ने जेल भेजा नीलगंगा टीआई तरुण कुरील ने बताया कि नोबल पॉली क्लीनिक को सील कर दिया है। कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपी डॉ देवेश तिवारी और डॉ राजेश चौहान को गिरफ्तार कर जिन्हे आज कोर्ट में पेश किया गया। जहां से कोर्ट ने दोनों को जेल भेजने के आदेश दिए है। सीएमएचओ अशोक पटेल ने बताया कि एडिशनल ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. डीके तिवारी के संबंध में प्रतिवेदन मुख्यालय भेज दिया है।
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उज्जैन में छात्रा की मौत मामले में कार्रवाई:स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी समेत क्लीनिक संचालक गिरफ्तार, कोर्ट ने दोनों आरोपियों को भेजा जेल















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