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कोंडागांव जिले के मसोरा गांव से इन दिनों एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो तेज गर्मी के बीच भी दिल को सुकून दे जाती है। जहां एक ओर लोग तपती धूप और बढ़ते तापमान से परेशान हैं, वहीं गांव के हरे-भरे पेड़ों की छांव में खेलते छोटे बच्चों की मुस्कान प्रकृति की अनमोल खूबसूरती को महसूस कराती है। गांव के मजदूर परिवार अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त हैं, लेकिन उन्हीं पेड़ों की ठंडी छांव के नीचे पुराने कपड़ों से बने झूले में झूलते मासूम बच्चों की खिलखिलाहट हर किसी का मन मोह लेती है। मिट्टी की सोंधी खुशबू, पत्तों से छनकर आती हल्की धूप और बच्चों की निश्छल हंसी मिलकर ऐसा दृश्य बनाती है, जिसे देखकर मन अपने आप खुश हो जाता है। पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन नहीं सुकून, ठंडक और जीवन देती है यह नजारा सिर्फ गांव के बचपन की मासूमियत नहीं दिखाता, बल्कि प्रकृति और इंसान के गहरे रिश्ते को भी महसूस कराता है। जिन पेड़ों की छांव आज इन बच्चों को गर्मी से राहत दे रही है, वही पेड़ जीवन का सबसे बड़ा सहारा हैं। पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन या हरियाली नहीं देते, बल्कि इंसान को सुकून, ठंडक और जीवन जीने का आधार भी देते हैं। विकास के नाम पर पेड़ कटे जा रहे हैं आज जब विकास के नाम पर लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है, तब मसोरा गांव की यह तस्वीर एक बड़ा संदेश देती है, अगर पेड़ बचेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों की मुस्कान भी बची रहेगी। प्रकृति हमें हर दिन यह समझाने की कोशिश करती है कि हरियाली ही जीवन की असली खुशहाली है। जरूरत इस बात की है कि हर व्यक्ति पेड़ों की रक्षा करने और ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने का संकल्प ले। ताकि आने वाले समय में धरती का हर कोना इसी तरह बच्चों की हंसी, पेड़ों की छांव और प्रकृति की खूबसूरती से भरा रहे।
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कोंडागांव में बच्चों ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश:पेड़ सिर्फ फल-फूल नहीं, जीवन का सुख भी बांटते हैं













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