भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले में सहकारिता आंदोलन को मजबूत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। उपायुक्त सह जिला सहकारिता विकास समिति (डीसीडीसी) के अध्यक्ष अनन्य मित्तल की अध्यक्षता में शुक्रवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित जिला सहकारिता विकास समिति की बैठक में सहकारिता संस्थाओं के आधुनिकीकरण, नई समितियों के गठन, गोदाम निर्माण और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया। सभी चयनित समितियों को सीएससी आईडी व झारसेवा आईडी उपलब्ध कराने, उन्हें ई-पैक्स के रूप में विकसित करने और समितियों में बैंकिंग व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी। उपायुक्त अनन्य मित्तल ने सीएससी मैनेजर को निर्देश देते हुए कहा कि जिन लैंप्स एवं पैक्स में अब तक सीएससी आईडी अथवा झारसेवा आईडी नहीं बनी है, वहां शीघ्र प्रक्रिया पूरी कर उन्हें सक्रिय किया जाए। बैठक में मत्स्यजीवी एवं दुग्ध उत्पादक सहयोग समितियों के विस्तार को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। उपायुक्त ने जिले के सभी मत्स्यजीवियों की संख्या एवं गतिविधियों का विस्तृत विवरण तैयार करने के निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने प्रत्येक पंचायत में दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति गठित करने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि जिले में वर्तमान में 15 दुग्ध उत्पादक समितियां कार्यरत हैं, जबकि मेधा डेयरी के माध्यम से 75 मिल्क पोलिंग पॉइंट संचालित किए जा रहे हैं। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के लिए 100 और 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदामों के निर्माण के लिए भूमि चिन्हित करने पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर स्थल निरीक्षण कराने का निर्देश दिया। ताकि योजनाओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जा सके। इसके अलावा पशु औषधि विक्रय केंद्र स्थापित करने, एमपीसीएस में मिनी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला एवं कृषि उपकरण उपलब्ध कराने जैसे प्रस्तावों पर भी मंथन हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत संचालित पाइप जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव कार्यों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। बैठक से पूर्व उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में ज्वाइंट वर्किंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें निष्क्रिय सहकारी समितियों की पहचान कर उनके पुनर्गठन तथा नई समितियों के गठन की रणनीति पर चर्चा की गई। “सहकार से समृद्धि” अभियान के तहत गांव स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और किसानों को सहकारिता से जोड़ने पर भी बल दिया गया। उपायुक्त अनन्य मित्तल ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी प्रस्तावों की गहन जांच कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए तथा अगली बैठक में अद्यतन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।
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गढ़वा में सहकारिता क्षेत्र को मिलेगा नया विस्तार ग्रामीण रोजगार पर विशेष ध्यान देने का निर्देश












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