जच्चा-बच्चा की मौत मामले के बाद से स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने में जुटा प्रशासन




भास्कर न्यूज| सरायकेला राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 4 मई को प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जिला प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर हो गया है। इसी क्रम में उपायुक्त द्वारा जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था सुधारने को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जारी आदेश में स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यशैली की शिथिलता, प्रशासनिक निष्क्रियता तथा विभिन्न अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर संचालन पर जोर दिया गया है। आदेश के तहत सदर अस्पताल सरायकेला एवं अनुमंडलीय अस्पताल चांडिल के लिए संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों को सह प्रशासक के रूप में अधिकृत किया गया है। वहीं प्रखंड स्तर के सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के निरीक्षण की जिम्मेदारी संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों को सौंपी गई है। निर्देश में कहा गया है कि सभी अधिकृत सह प्रशासक नियमित रूप से स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान अस्पतालों में साफ-सफाई, दवा उपलब्धता, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति, उपकरणों की कार्यशीलता, प्रसव कक्ष की व्यवस्था, वार्ड प्रबंधन तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विशेष रूप से जांच की जाएगी। उपायुक्त ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेख एवं सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हो। उपायुक्त की इस पहल को राजनगर घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नियमित निगरानी एवं जवाबदेही तय होने से जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार देखने को मिलेगा।



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