नेतरहाट में अब भवन निर्माण के लिए नहीं मिलेगा एनओसी




भास्कर न्यूज | महुआडांड़ नेतरहाट में नियमों के उल्लंघन पर अनुमंडल प्रशासन द्वारा एक निर्माणाधीन होटल को सील करने और प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद वन विभाग ने भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की रूपरेखा को लेकर डीएफओ कुमार आशिष ने सख्त रुख अपनाया है। डीएफओ ने स्पष्ट कर दिया है कि नेतरहाट की प्राकृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। यह कुर्गी मोजा प्रोटेक्टेड एरिया में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार का नया निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में किसी भी नए निर्माण कार्य के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है और ना ही किसी को एनओसी दिया जा सकता है। नेतरहाट में पहले से बने ढांचों को आगामी पर्यटन मास्टर प्लान में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन नए निर्माणों के लिए मास्टर प्लान के तहत स्वीकृत योजना के नियम ही लागू होंगे। डीएफओ कुमार आशिष ने बताया कि अगले 15 दिनों के भीतर नेतरहाट पर्यटन मास्टर प्लान आने की संभावना है। इस प्लान के लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नेतरहाट में किस प्रकार के व्यावसायिक निर्माण और गतिविधियों को अनुमति दी जाएगी। वर्तमान नियमों के तहत संरक्षित क्षेत्र की एक किलोमीटर की परिधि में केवल स्थानीय निवासी ही सीमित आवासीय या छोटे व्यावसायिक निर्माण कर सकते हैं। बाहरी व्यक्तियों को मास्टर प्लान लागू होने के बाद ही अनुमति मिल सकेगी। नेतरहाट इको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) और पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के बफर क्षेत्र में आता है। भारत सरकार के वर्ष 2019 में जारी गजट अधिसूचना के अनुसार इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए वाणिज्यिक होटल, रिसॉर्ट निर्माण पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद पिछले 5 सालों में यहां होटलों की संख्या 20 से बढ़कर 50 से अधिक हो गई। नतीजतन, नेतरहाट इको सेंसेटिव जोन वास्तविक स्थिति से अब विपरीत दिखाई देने लगी है। ईएसजेड गजट नोटिफिकेशन 2019 में कहा गया है कि अभयारण्य/राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से एक किमी के भीतर नए होटल, रिसॉर्ट का निर्माण प्रतिबंधित हैं। जबकि, ईएसजेड के भीतर बड़े वाणिज्यिक होटल सामान्य रूप से अनुमति योग्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी देशभर के इको सेंसिटिव जोन में बिना अनुमति निर्माण पर स्पष्ट रोक लगाई है। निर्देशों में कहा गया है कि बिना पर्यावरणीय मंजूरी के संरक्षित क्षेत्रों में वाणिज्यिक ढांचे जैव विविधता के लिए खतरनाक हैं। 15 दिनों में आएगा पर्यटन मास्टर प्लान



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