पहचान होने पर दवा और जीवनशैली में सुधार कर थायराइड पर आसानी से पाया जा सकता है नियंत्रण




भास्कर न्यूज| सरायकेला सरायकेला-खरसावां समेत पूरे कोल्हान क्षेत्र में थायराइड रोग के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सदर अस्पताल और निजी पैथोलॉजी केंद्रों में हर महीने बड़ी संख्या में लोग थायराइड जांच करा रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार महिलाओं और युवाओं में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। देशभर में थायराइड अब एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। विभिन्न स्वास्थ्य अध्ययनों के अनुसार भारत में करीब 4 से 5 करोड़ लोग किसी न किसी थायराइड समस्या से प्रभावित हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक देश में थायराइड या घेंघा संबंधी मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरायकेला-खरसावां जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास अलग से विस्तृत सार्वजनिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों में जांच कराने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। खासकर थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, तनाव, अनियमित माहवारी और शुगर-बीपी से पीड़ित मरीजों में थायराइड की शिकायत अधिक मिल रही है। सदर अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. नकुल चौधरी ने कहा कि थायराइड अब केवल उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं रह गई है। अनियमित खानपान, तनाव, फास्ट फूड और शारीरिक गतिविधि में कमी इसके बड़े कारण हैं। समय पर जांच और नियमित दवा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। चिकित्सकों ने लोगों से आयोडीन युक्त नमक के उपयोग, नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित भोजन और योग-व्यायाम करने की अपील की है। विश्व थायराइड दिवस पर जिले में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। सदर अस्पताल सरायकेला के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी ने बताया कि थायराइड शरीर की एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो हार्मोन के माध्यम से शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदय गति और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करती है। जब इसमें असंतुलन होता है तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगती हैं। उन्होंने कहा कि थायराइड के सामान्य लक्षणों में लगातार थकान रहना, वजन का अचानक बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, चिड़चिड़ापन, नींद नहीं आना, अधिक पसीना आना, हाथ कांपना, महिलाओं में अनियमित माहवारी तथा गले में सूजन शामिल हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी बढ़ जाती है। डॉ. चौधरी ने बताया कि इससे बचाव के लिए संतुलित भोजन, आयोडीन युक्त नमक का सेवन, नियमित व्यायाम, तनाव से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जरूरी है। परिवार में किसी को थायराइड की समस्या हो तो अन्य सदस्यों को भी समय पर जांच करानी चाहिए। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर दवा और जीवनशैली में सुधार से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।



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