भास्कर न्यूज|गुमला नगर क्षेत्र के लघु व मध्यम आरओ प्लांट संचालकों ने नगर परिषद द्वारा लगाए गए भारी वार्षिक शुल्क और जटिल नियमों के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को रिवर्स ओसमोसिस संचालक समिति के बैनर तले संचालकों ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को एक सामूहिक आवेदन सौंपा। इसमें उन्होंने नए नियमों पर पुनर्विचार करने और राहत देने की मांग की है। समिति के अध्यक्ष गोपाल मिश्रा, शहाबुद्दीन खान, मुजाहिद हुसैन और अभिषेक सोरेंग सहित पदाधिकारियों ने बताया कि नगर परिषद द्वारा 20000 वार्षिक शुल्क और 5000 पंजीकरण शुल्क तय किया गया है। इसके साथ ही रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य करने और सीजीडब्लूए एनओसी जैसी बेहद जटिल व महंगी प्रक्रियाएं पूरी करने का नियम बनाया गया है। सीमित आय वाले छोटे संचालकों के लिए बढ़ती महंगाई के बीच इन खर्चों और नियमों को पूरा करना अत्यंत कठिन हो गया है। संचालकों का कहना है कि वे बहुत छोटे स्तर पर घरों और किराए के छोटे कमरों में प्लांट लगाकर व्यवसाय चला रहे हैं। वे आम जनता को मात्र 10 से 15 प्रति जार की दर से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराते हैं। इतने कम मुनाफे में भारी शुल्क और कड़े नियम लागू होने से उनका रोजगार पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच जाएगा। संचालकों की मुख्य मांगें है पूर्व में 5000 देकर किए गए पंजीकरण को ही स्थायी मान्यता दी जाए। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और सीजीडब्लूए एनओसी की जटिल बाध्यता से पूरी तरह राहत मिले। भारी वार्षिक शुल्क को कम कर व्यावहारिक बनाया जाए। समिति ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो गुमला नगर क्षेत्र के सभी छोटे और मध्यम संचालक आगामी दिनों में चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस आंदोलन के कारण यदि शहर में पेयजल की किल्लत होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
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भारी शुल्क और जटिल नियमों के खिलाफ आरओ संचालक लामबंद













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