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रांची यूनिवर्सिटी में बौद्धिक संपदा की चोरी का मामला सामने आया है। आदिवासी लोक साहित्य की एक चर्चित पुस्तक के विषय और सामग्री को ही पीएचडी रिसर्च के लिए उपयोग किया गया है। इस किताब का नाम ‘उरांव लोक गीतों में नारी चित्रण’ है, जिसे वर्ष 2021 में तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू द्वारा राजभवन में विमोचित किया गया था। इसके बावजूद इसी विषय पर स्कॉलर शकुंतला द्वारा पीएचडी रिसर्च किया जा रहा है। शोध पंजीयन, थीसिस मूल्यांकन के बाद 25 मई को इंटरव्यू तय होने से विश्वविद्यालय की पूरी शोध प्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। पुस्तक के लेखक विजय कुमार ने भी विवि प्रशासन से शिकायत की है। जिसमें कहा था कि मेरी किताब के विषय व सामग्री का उपयोग पीएचडी शोधकार्य में किया जा रहा है। जेएसएससी की परीक्षा में इस पुस्तक के लेखक कौन है, से संबंधित प्रश्न भी पूछा गया था। यूजीसी नियमों के अनुसार, किसी भी पीएचडी शोधकार्य का मौलिक होना अनिवार्य है। किसी विषय पर पहले से पुस्तक, शोधपत्र या अकादमिक सामग्री प्रकाशित है, तो शोधार्थी को उसका स्पष्ट संदर्भ देना होता है। लेकिन हूबहू उसी विषय पर रिसर्च नहीं कर सकते हैं। यूजीसी ने शोध कार्यों में नकल रोकने के लिए प्लेजरिज्म (साहित्यिक चोरी) की जांच को अनिवार्य बनाया है। शोध प्रबंध जमा होने से पहले उसे सॉफ्टवेयर जांच से गुजरना होता है। शिकायत मिलने के बाद आरयू के तत्कालीन रजिस्ट्रार 29 जनवरी, 2024 को पत्र जारी कर स्पष्ट कहा गया था कि इस विषय पर पीएचडी शोधकार्य की अनुमति नहीं दी जा सकती। यदि इस विषय पर अनुमति दी गई है तो उसे रद्द किया जाए। अब बड़ सवाल यह है कि जब विवि प्रशासन द्वारा रोक लगा दी गई थी तो पीएचडी इंटरव्यू की तिथि कैसे निर्धारित हो गई। इंटरव्यू के लिए विनोबा भावे विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह को एक्सपर्ट के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस पीएचडी रिसर्च को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इसमें रोक के बाद दोबारा फाइल आगे कैसे बढ़ी? थीसिस का किस आधार पर मूल्यांकन हुआ? पीएचडी वायवा के लिए इंटरव्यू की तारीख आखिर किसने तय की? विवि द्वारा रोक लेकर जारी पत्र परीक्षा विभाग कैसे अनभिज्ञ रहा? पीएचडी थिसिस का प्लेजरिज्म जांच में नकल क्यों पकड़ में नहीं आई? टीआरएल विभाग के कुडुख विभाग में शकुंतला का 25 मई को होने वाले पीएचडी इंटरव्यू को लेकर विवि से पत्र मिला है। जबकि आरयू के रजिस्ट्रार के पत्र के अनुसार पीएचडी पर रोक है। ऐसी स्थिति में यूनिवर्सिटी प्रशासन से मार्गदर्शन मांगा गया है, जो अभी नहीं मिला है। – डॉ. बंदे खलखो, एचओडी. टीआरएल विभाग, आरयू
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रांची विश्वविद्यालय के पीजी टीआरएल विभाग में पहले से प्रकाशित पुस्तक पर तैयार हो गई पीएचडी की थीसिस











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