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भास्कर न्यूज | बालोद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जनभागीदारी मॉडल पर संचालित सिलाई प्रशिक्षण केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास का माध्यम बन रहा है। ग्राम दनिया, जोगीभाठ और सिंगापुर में प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जबकि वर्तमान में प्रशिक्षण केंद्र बोरी गांव में संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का संचालन महिला कमांडो भीमेश्वरी शांडिल्य एवं सरस्वती साहू की पहल पर किया जा रहा है। पद्मश्री शमशाद बेगम ने बताया कि यह प्रशिक्षण केंद्र पूरी तरह जनभागीदारी से संचालित है। केंद्र को केवल दस सिलाई मशीनें निशुल्क उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें 45 दिन की प्रशिक्षण अवधि समाप्त होने के बाद दूसरे गांव में स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण केंद्र की महिलाएं स्वयं अपने नियम बनाती हैं। गांव की ही महिला को ट्रेनर बनाया जाता है, जिसे गुरुदक्षिणा, सुई, धागा और कपड़े की व्यवस्था महिलाओं एवं महिला कमांडो के सहयोग से दी जाती है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्वयं सीखो और स्वयं करो की भावना से आत्मनिर्भर बनाना है। भीमेश्वरी शांडिल्य ने बताया कि गांवों में सर्वे कर महिलाओं को चिन्हित किया गया और उन्हें प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया गया। वर्तमान में बोरी गांव के केंद्र में 37 महिलाएं नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। प्रशिक्षण देने का कार्य सोनम साहू कर रही हैं। इस पहल में ग्रामीण अध्यक्ष भागवत राम साहू, खेमिन साहू, रूपराम सोनवानी तथा अंबिका ठाकुर द्वारा भी समय-समय पर केंद्र का निरीक्षण कर सहयोग दिया जा रहा है।
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सिलाई: अब तक 150 महिलाएं हुईं प्रशिक्षित














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