16 को वट सावित्री व शनि जयंती, पूजा के लिए सूर्योदयकालीन मुहूर्त सबसे उत्तम



पर्व-त्योहारों की दृष्टि से ज्येष्ठ मास खास रहने वाला है। वट सावित्री, शनि जयंती, गंगा दशहरा, फलाहारिणी अमावस्या जैसे पर्व इस महीने रहेंगे। साथ ही उत्पना एकादशी, पुरुषोत्तमी एकादशी, मास शिवरात्रि, प्रदोष व्रत भी रहेगी। इस 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या है। वट सावित्री पूजा और शनि जयंती दोनों इसी दिन मनाई जाएगी। ज्येष्ठ शुद्ध अमावस्या पर सुहागिनें अपने सुहाग की लंबी आयु की कामना के लिए उपवास पर रहेंगी। वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करेंगी। साथ ही इस दिन शहर के प्रमुख शनि मंदिरों में शनि महाराज का पूजनोत्सव किया जाएगा। ज्योतिष शालिनी वैद्य के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर वट सावित्री पूजा पड़ती है। शनि जयंती पड़ने से इस दिन को और खास बना रहा है। 15 मई को अमावस्या संध्या 03:51 बजे से शुरू होगी, जो 16 मई को दोपहर 1:36 बजे तक होने से वट सावित्री व्रत का मान दिनभर होगा। पूजा के लिए सूर्योदयकालीन मुहूर्त सबसे उत्तम होता है। सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य, उन्नति और संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। चंद्रमा के वृषभ राशि में रहने से शुभ संयोग लेकर आएगा। भरणी नक्षत्र व कृत्तिका नक्षत्र और सौभाग्य व शोभन योग भी रहेगा। मान्यताओं के अनुसार यह व्रत सावित्री द्वारा सत्यवान के जीवन की पुनः प्राप्ति के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। झारखंड-बिहार में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन महिलाएं वट सावित्री पूजा की करती हैं। उपवास में रहकर वट वृक्ष का पूजन करती हैं। वट वृक्ष के चारों ओर मौली धागा लपेटकर परिक्रमा करने की परंपरा है।



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