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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) प्रशासन के प्रति सख्त रुख अपनाया है। यह मामला वर्ष 2020 से लंबित एक सेवा संबंधी है, जिसकी सुनवाई लगातार टाली जा रही थी। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई पर भी मामला टालने का प्रयास किया गया तो विश्वविद्यालय प्रशासन पर 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया जाएगा। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने की। यह याचिका डॉ. नीतू सिंह ने दाखिल की है, जिसमें उन्होंने अपने बर्खास्तगी आदेश को चुनौती दी है। न्यायालय ने अपने आदेश में बताया कि यह याचिका जुलाई 2020 से लंबित है। मामले में सभी शपथ पत्र दाखिल होने के बावजूद, प्रतिवादी पक्ष (केजीएमयू) बार-बार समय मांग रहा है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि 26 अप्रैल और 7 मई 2026 को भी केजीएमयू के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी। सुनवाई के दौरान केजीएमयू के प्रशासनिक अधिकारी संबंधित अभिलेखों के साथ अदालत में उपस्थित हुए। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अब मामले की सुनवाई को और लंबा नहीं खींचा जाएगा।
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2020 से लंबित मामले में हाईकोर्ट नाराज:केजीएमयू को हर्जाने की चेतावनी, अगली सुनवाई पर बढ़वाने पर 10 हजार रुपये देने होंगे















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