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कटनी जंक्शन रेलवे स्टेशन पर खानपान स्टॉल संचालक यात्रियों से निर्धारित मूल्य (MRP) से अधिक कीमत वसूल रहे हैं। प्लेटफॉर्मों पर संचालित इन स्टॉलों पर कोल्डड्रिंक और पानी की बोतलें जैसी पैक्ड सामग्री एमआरपी से 10 रुपए तक अधिक बेची जा रही है। रेलवे प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित दिख रही है। उदाहरण के लिए, 30 रुपए की कोल्डड्रिंक 40 रुपए में और 14 रुपए की पानी की बोतल 20 रुपए तक में बेची जा रही है। यात्रियों को सामान खरीदने पर बिल भी नहीं दिया जा रहा है, जो रेलवे बोर्ड के ‘पहले बिल, फिर भुगतान’ नियम का सीधा उल्लंघन है। यह स्थिति कटनी के मुडवारा और मुख्य स्टेशन दोनों पर लंबे समय से बनी हुई है। आरोप है कि जिम्मेदार विभाग या तो इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं या फिर केवल प्रतीकात्मक जुर्माना लगाकर मामले को शांत कर दिया जाता है। यात्रियों की जुबानी, अव्यवस्था की कहानी
सतना के यात्री शशीदीप मिश्रा ने बताया कि हम कई बार स्टेशन से पानी और खाने-पीने का सामान खरीद चुके हैं, लेकिन कभी किसी स्टॉल संचालक ने बिल नहीं दिया। बिल मांगने पर कई बार विवाद और बदतमीजी जैसी स्थिति बन जाती है, इसलिए लोग ट्रेन छूटने के डर से चुपचाप सामान लेकर चले जाते हैं।
जबलपुर के यात्री मनीष कुमार ने बताया है कि मुझे आज पहली बार जानकारी मिली है कि रेलवे स्टेशन के स्टॉलों में पहले बिल दिया जाना चाहिए। यदि रेलवे ने कोई जनहित का नियम बनाया है, तो उसका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी तो रेल प्रशासन की ही है। रोज गुजरती हैं 100 से ज्यादा ट्रेनें, दांव पर हजारों यात्रियों की जेब
कटनी रेलवे स्टेशन पांच दिशाओं को जोड़ने वाला एक विशाल जंक्शन है। यहां से प्रतिदिन एक सैकड़ा (100) से अधिक यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। स्टेशन के छह प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों की सुविधा के लिए खानपान, पैक्ड फूड, पानी, दूध, चाय और स्नैक्स के दर्जनों स्टॉल संचालित हैं। रोजाना हजारों यात्री इन स्टॉलों से खरीदारी करते हैं।
यदि एक गणितीय अनुमान लगाया जाए, तो प्रत्येक यात्री से महज 5 से 10 रुपए अतिरिक्त वसूलने पर भी प्रतिदिन लाखों रुपए की अवैध कमाई का काला कारोबार पनप रहा है। यही मुख्य कारण है कि छोटा-मोटा जुर्माना होने के बावजूद यह अवैध खेल बिना किसी डर के लगातार जारी है। लाइसेंस निरस्त करने से बचते हैं अधिकारी रेलवे प्रशासन और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा समय-समय पर स्टेशन के स्टॉलों की जांच के दावे किए जाते हैं। लेकिन इन अभियानों में केवल साफ-सफाई, वेंडर लाइसेंस और खाद्य गुणवत्ता जैसे सतही मुद्दों पर ही कार्रवाई दिखाई देती है। ओवरचार्जिंग और बिलिंग व्यवस्था की जमीनी और कड़ी जांच शायद ही कभी होती हो। पिछले दो वर्षों के रिकॉर्ड को देखें तो कटनी स्टेशन पर ऐसा कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया, जिसमें लगातार आ रही ओवरचार्जिंग की शिकायतों के बाद किसी रसूखदार स्टॉल संचालक का लाइसेंस निरस्त किया गया हो। यही वजह है कि यात्रियों को इस लूट से राहत नहीं मिल पा रही है। जल्द ही स्टॉल संचालक का लाइसेंस निरस्त करेंगे जबलपुर रेल मंडल, सीनियर डीसीएम, मधुर वर्मा ने बताया है कि स्टेशनों पर लगातार अभियान चलाकर जांच की जा रही है। हम ऐसे स्टॉल्स को चिन्हित कर रहे हैं, जिन्हें ओवरचार्जिंग में पकड़ा गया है और उन पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है। जल्द ही ऐसे आदतन स्टॉल स्वामियों के लाइसेंस निरस्त करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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कटनी जंक्शन पर 'नो बिल, नो पे' नियम हवा:खानपान स्टॉलों पर MRP से 10 रुपए तक ज्यादा वसूली, बिल भी नहीं















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