खामियां ही खामियां:बसों में अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स व बेसिक सुरक्षा इंतजाम तक नहीं मिले




राजधानी में सिटी बसों से सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा गंभीर सवालों के घेरे में है। 9 मई को वीआईपी चौक के पास चलती बस में आग लगने के बाद भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि कई बसें बिना अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स और सही हैंडब्रेक के सड़कों पर दौड़ रही हैं। कई सिटी बसें जर्जर हालत में हैं। इसलिए ऐसी स्थिति है ​क्योंकि कोरोना काल के बाद सिटी बसों के संचालन के लिए पांच साल का टेंडर किया गया था। इसका संचालन मनीष ट्रैवल्स कर रही है। बसों के संचालन, मेंटेनेंस, बीमा और कर्मचारियों के वेतन की जिम्मेदारी कंपनी पर है। इसके बदले कंपनी नगर निगम को प्रति बस हर महीने 3500 रुपए रॉयल्टी देती है। इसके बाद भी सिटी बसें कंडम हो रही हैं। भास्कर टीम ने शहर के अलग-अलग रूटों पर चल रही बसों में सफर कर हालात देखे। जांच में कई बसों में अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं मिले। कई बसों की सीटें टूटी थीं, लाइट खराब थीं और सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब मिली। हैंडब्रेक खराब, पत्थर लगाकर रोकी गाड़ी रायपुर रेलवे स्टेशन…मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे भास्कर टीम रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां कुछ देर बाद बस क्रमांक CG 04 E 3526 आई। ड्राइवर ने बस को निकासी गेट के पास खड़ा किया, लेकिन हैंडब्रेक खराब होने के कारण परिचालक को बस के चक्के के सामने पत्थर लगाना पड़ा। यह बस रेलवे स्टेशन से तेलीबांधा होते हुए मंदिर हसौद तक जाती है। बस के भीतर गर्मी से हाल खराब था। कई खिड़कियां बंद नहीं हो रही थीं। सीटों से गद्दे गायब थे। बस में न अग्निशामक यंत्र था और न ही फर्स्ट एड किट। हिल रही थीं सीटें, लाइटें भी खराब धरसींवा जा रही बस CG 04 E 3557 में भास्कर रिपोर्टर ने सफर किया। यह बस यात्रियों से भरी हुई थी। सीट कवर फटे हुए थे और सीटों का स्पंज पूरी तरह दब चुका था। बस के चलने, ब्रेक लगाने और मोड़ लेने के दौरान सीटें हिल रही थीं। मुख्य हेडलाइट खराब होने के कारण सामने अलग से दो लाइट लगाई गई थीं। इस बस में भी अग्निशामक यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिला। सफर कर रहे यात्रियों ने बताया कि खिड़कियां खराब हैं, जिससे गर्मी-लू से लगातार परेशानी हो रही है। नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं
सिटी बसों में नियमानुसार सभी सुरक्षा उपकरण होने चाहिए। बसों की फिटनेस भी जरूरी है। यदि नियमों की अनदेखी हो रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
– संबित मिश्रा, आयुक्त, नगर निगम रायपुर सिटी बस में ये प्रमुख हादसे जून 2024: अभनपुर के पास 40 यात्रियों से भरी बस में रेडिएटर ओवरहीटिंग और तकनीकी खराबी से आग लगी।
जुलाई 2024: रायपुर में चलती बस में शॉर्ट सर्किट से आग लगी, यात्री कूदकर बाहर निकले।
9 मई 2026: वीआईपी चौक के पास चलती सिटी बस में आग लगी, यात्री उतारे गए, बस पूरी तरह जल गई। 300 से घटकर 33 बसें रह गईं रायपुर में सिटी बस सेवा की शुरुआत 2008 में 40 बसों के साथ हुई थी। दूसरे चरण में 2013 में 100 और बसें शुरू की गईं। कोरोना से पहले रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में 300 से अधिक बसें चलती थीं। कोरोना के बाद बसों की संख्या लगातार घटती गई और अभी करीब 20 बसें ही सड़कों पर चल रही हैं। ये है नियम



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