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भास्कर न्यूज|गुमला शहरी अमृत मिशन योजना 2.0 के तहत वर्ल्ड बैंक के सहयोग से संचालित होने वाली इस 113 करोड़ रुपए की वृहद जलापूर्ति योजना फिलहाल बंद है। योजना के तहत चार जलमीनार, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सहित मीटर युक्त हाउस सर्विस कनेक्शन बनना है। इस योजना से लगभग 60 हजार लोगों तक पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य है। लेकिन शुरुआत के लिए शहर के बाजार टांड़ में एक अत्याधुनिक जलमीनार का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। लेकिन जिस सरकारी भूमि को इस जलमीनार के निर्माण के लिए चयनित किया गया है। वहां अवैध रूप से मुर्गा और कबाड़ की दुकानें संचालित हो रही हैं। जमीन को अब तक अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका है। जिसके चलते काम शुरू नहीं किया जा रहा हैं। जानकारी के अनुसार नवंबर 2025 में इस योजना के िशलान्यास के बाद शुरू के चार महीने सर्वे का काम हुआ, लेकिन इसके बाद जमीन से अतिक्रमण नहीं हटने के कारण काम रूका है। हालांकि प्रशासन ने सरकारी जमीन पर कब्जा िकए दुकानदारों को अप्रैल 2026 तक खाली करने का आदेश िदया था। इधर निष्क्रियता के खिलाफ जनप्रतिनिधियों में आक्रोश पनप रहा है। जिसे लेकर वार्ड पार्षद अनिल यादव ने नगर परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कार्यपालक पदाधिकारी को लिखित देते हुए 17 मई तक जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू करने का समय देते हुए चेतावनी दी थी िक इसके बाद धरना प्रदर्शन िकया जाएगा। पार्षद ने कहा 18 मई को दस बजे तक कोई प्रगति या सूचना नहीं मिली, तो आगे का निर्णय लेंगे। उधर नप उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने बताया कि पार्षद से प्राप्त आवेदन को उन्होंने एसडीओ को प्रेषित कर कार्रवाई का अनुरोध किया है। यदि धरना पर बैठने की नौबत आएगी, तो वो भी जनप्रतिनिधियों के साथ धरना देंगे। चयनित भूमि से दूर बनेगा जलमीनार : ईओ: ईओ मनीष कुमार ने कहा कि जलमीनार के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। बाजार टांड़ में ही थोड़ी दूर जलमीनार का निर्णय लिया गया है । दुकानदारों का कहना है कि वे ठेकेदार से एग्रीमेंट कर व किराया देकर दुकान चला रहे है। उन्हें हटा दिया गया, तो भूखमरी हो जाएगी। जिस जगह से उन्हें हटाया जाना है। वहां पर धार्मिक स्थल भी है। बाजार टांड़ में पर्याप्त भूमि है। प्रशासन चाहे, तो दूसरी जगह पर जलमीनार बनाया जा सकता है।
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निर्माण स्थल पर अतिक्रमण, 60 हजार लोगों तक पेयजल पहुंचाने की योजना रुकी












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