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झाबुआ जिले के पेटलावद नगर में वरिष्ठ श्रावक शांतिलालजी गादिया का 61 दिनों के कठिन संथारा के बाद देवलोकगमन हो गया। उन्होंने जैन धर्म की प्राचीन परंपरा का पालन करते हुए अंतिम समय में 61 दिनों तक अन्न-जल का त्याग कर तप (अनशन) साधना की थी। उनकी अंतिम विदाई के दौरान पूरा नगर श्रद्धा में डूबा नजर आया। शांतिलालजी गादिया ने आचार्य महाश्रमण जी की प्रेरणा और संतों के मार्गदर्शन में यह कठिन संथारा साधना पूरी की। उनकी 61 दिनों की इस लंबी तपस्या को आध्यात्मिक शक्ति का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। जैसे ही उनके देवलोकगमन की खबर फैली, बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शनों के लिए पहुंच गए। सम्मान में बंद रहे व्यापारिक प्रतिष्ठान दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान और उनकी तपस्या के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए सकल जैन समाज सहित अलग-अलग धार्मिक संगठनों ने अपनी दुकानें बंद रखे। समाज के लोगों का कहना है कि यह शांतिलालजी की कठिन साधना के प्रति उनकी सच्ची श्रद्धांजलि है। श्रद्धा के साथ निकली अंतिम यात्रा उनकी अंतिम यात्रा में तेरापंथ समाज, स्थानकवासी श्री संघ और मंदिर मार्गीय सहित जैन समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। यह यात्रा थांदला रोड से शुरू हुई और श्रद्धांजलि चौक व पुराने बस स्टैंड से होते हुए मुक्तिधाम पहुंची। रास्ते भर लोग इस महान तपस्वी को नमन करते रहे। बेटों ने दी मुखाग्नि मुक्तिधाम में उनके पुत्र पारस गादिया और अजित गादिया ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं और मुखाग्नि दी। महावीर समिति और पेटलावद के सकल जैन समाज ने इस महान तपस्वी की साधना को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।
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शांतिलालजी गादिया का 61 दिन संथारा के बाद देवलोकगमन:पेटलावद में जैन समाज ने दुकानें बंद रखी, अंतिम यात्रा में जुटे लोग














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