कान्हा में गिद्धों गिनती, पहले दिन 306 दर्ज:पहले किसली और सरही क्षेत्रों में 224 गिद्ध मिले थे, अब 266 देखे गए




कान्हा टाइगर रिजर्व में शुक्रवार से गर्मी के मौसम की गिद्धों की गिनती शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश वन विभाग के आयोजित ‘गिद्ध गणना-2026’ के दूसरे चरण के तहत यह काम 24 मई तक चलेगा। पहले ही दिन कान्हा के अलग-अलग इलाकों में कुल 306 गिद्ध देखे गए हैं, जो पर्यावरण के लिहाज से काफी अच्छे संकेत हैं। यह गणना कान्हा टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन के साथ-साथ फेन वाइल्डलाइफ सेंचुरी के सभी 13 क्षेत्रों में की जा रही है। इसके लिए वन विभाग की टीम सुबह 5:30 बजे से ही जंगल के 182 अलग-अलग हिस्सों (बीटों) में तैनात हो गई थी। आंकड़ों को पूरी सटीकता से दर्ज करने के लिए विभाग के बनाए गए “गरूण” मोबाइल एप और डाटा शीट का इस्तेमाल किया जा रहा है। गिद्धों की संख्या में हुई बढ़ोतरी कान्हा के डिप्टी डायरेक्टर पी.के. वर्मा ने बताया कि पहले दिन दर्ज किए गए 306 गिद्धों में भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध शामिल हैं। यह संख्या पिछले रिकॉर्ड से काफी बेहतर है। इससे पहले फरवरी 2026 में हुई शीतकालीन गणना के दौरान कान्हा, किसली और सरही क्षेत्रों में 224 गिद्ध मिले थे। कान्हा में गिद्धों की अधिकतम संख्या अब तक 266 रही थी, लेकिन इस बार पहले ही दिन यह आंकड़ा पार हो गया है। पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी हैं गिद्ध? जानकारों का मानना है कि गिद्धों की बढ़ती संख्या जंगल और आसपास के माहौल के लिए बहुत फायदेमंद है। गिद्ध मृत जानवरों को खाकर जंगल की सफाई करते हैं, जिससे बीमारियां नहीं फैलतीं और प्रकृति का संतुलन बना रहता है। भारत में गिद्धों की 9 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से ज्यादातर खत्म होने की कगार पर हैं। मध्यप्रदेश में इनमें से 7 प्रजातियां मिलती हैं, जबकि कान्हा में मुख्य रूप से किंग वल्चर, हिमालयन ग्रिफॉन और व्हाइट-बैक्ड गिद्ध जैसी प्रजातियां देखी जाती हैं। 24 मई तक जारी रहेगी गणना गिद्धों की गिनती का यह काम रविवार, 24 मई तक जारी रहेगा। इन तीन दिनों के दौरान जिस दिन गिद्धों की संख्या सबसे ज्यादा दर्ज की जाएगी, उसे ही अंतिम और सही आंकड़ा माना जाएगा। वन विभाग के मैदानी अमले को इसके लिए खास ट्रेनिंग भी दी गई है ताकि गणना में कोई चूक न हो।



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