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बालाघाट की खैरलांजी जनपद पंचायत की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर हो गया। कलेक्टर कोर्ट ने जनपद अध्यक्ष आशु बघेले का चुनाव रद्द कर दिया है। उन्हें मध्यप्रदेश का जाति प्रमाण पत्र न होने की वजह से अयोग्य ठहराया गया। यह बड़ा फैसला शुक्रवार को हाई कोर्ट के आदेश के बाद आया है। जनपद सदस्य खुशबू बिसेन ने इस चुनाव को चुनौती देते हुए कोर्ट में अर्जी लगाई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि आशु बघेले ने ओबीसी महिला के लिए रिजर्व सीट से चुनाव तो लड़ा, लेकिन उनके पास मध्यप्रदेश का असली जाति प्रमाण पत्र नहीं था। उनके पास महाराष्ट्र सरकार का ‘पिंजारा’ जाति वाला सर्टिफिकेट था, जो यहां के चुनावों में आरक्षण के लिए मान्य नहीं होता। हाई कोर्ट ने दिया था दखल यह विवाद काफी समय से चल रहा था। पहले यह मामला कलेक्टर कोर्ट में था, फिर हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को पुराने आदेश को खत्म कर दिया और कलेक्टर कोर्ट को दोबारा सुनवाई करने को कहा। कोर्ट ने साफ कर दिया था कि 2019 के नियमों के मुताबिक, रिजर्व सीट पर चुनाव लड़ने के लिए मध्यप्रदेश का ही जाति प्रमाण पत्र चाहिए, सिर्फ शपथ पत्र (एफिडेविट) से काम नहीं चलेगा। खुद की गलती पड़ी भारी सुनवाई के दौरान कलेक्टर कोर्ट ने पाया कि आशु बघेले ने फॉर्म भरते समय खुद एक कॉलम में ‘नहीं’ लिखा था, जिसका मतलब था कि उनके पास मध्यप्रदेश का जाति सर्टिफिकेट नहीं है। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र का सर्टिफिकेट मध्यप्रदेश में आरक्षण का फायदा लेने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। चुनाव हुआ रद्द आखिरकार कोर्ट ने माना कि उनका फॉर्म मंजूर करना एक कानूनी गलती थी। इसी आधार पर उनका चुनाव रद्द कर दिया गया है, यानी अब वे जनपद अध्यक्ष नहीं रहेंगी।
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खैरलांजी जनपद अध्यक्ष आशु बघेले का चुनाव रद्द:कलेक्टर कोर्ट का फैसला, मप्र की जगह महाराष्ट्र का जाति प्रमाण पत्र लगाया था














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