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नगर पालिका प्रशासन महासमुंद की लापरवाही के कारण शहर के वार्ड क्रमांक 18 और 27 की जीवनरेखा माना जाने वाला गुडरूपारा तालाब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। करीब 5 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में फैला यह तालाब बीते 4-5 वर्षों से जलकुंभी और दलदल से पूरी तरह पट चुका है। विडंबना यह है कि हर साल सफाई के नाम पर लाखों रुपए फूंकने के बाद भी धरातल पर नतीजा शून्य है। गुडरूपारा तालाब केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि आसपास के कई वार्डों के लगभग 5 हजार से अधिक लोगों के दैनिक निस्तारी का प्रमुख साधन है। वार्डवासियों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन इस तालाब की सुध लेने में पूरी तरह नाकाम रहा है। अब तक जब भी सफाई कराई गई, वह सिर्फ एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई। वार्ड -18 के पार्षद माधुरी धनी यादव ने बताया कि तालाब से आधी-अधूरी जलकुंभी निकालकर छोड़ दिया जाता है, जिसके कारण कुछ ही दिनों में बची हुई जलकुंभी तेजी से दोबारा पूरे तालाब में फैल जाती है। यह सिलसिला पिछले कई सालों से चल रहा है। लेकिन तालाब को आज तक इस हरी मुसीबत से मुक्ति नहीं मिल सकी है। वर्तमान में बीते तीन दिनों से तालाब की सफाई के लिए 12 से 13 मछुआरों की टीम को काम पर लगाया गया है। लेकिन पालिका के लचर प्रबंधन का आलम देखिए कि निकाली जा रही जलकुंभियों को तालाब से दूर फेंकने के बजाय केवल किनारे पर ही ढेर किया जा रहा है। नगर पालिका द्वारा इन जलकुंभियों के परिवहन और ठोस प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। वार्डवासियों का कहना है कि अगर इन सूखी जलकुंभियों को उठाने के लिए तुरंत वाहनों की व्यवस्था नहीं की गई, तो आगामी बारिश के पानी के साथ ये दोबारा बहकर तालाब के भीतर चली जाएंगी और पूरी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। लोगों ने पालिका से तत्काल कचरा परिवहन वाहनों की ड्यूटी लगाने की मांग की है ताकि आगामी मानसून के बाद तालाब को एक नया स्वरूप और साफ पानी मिल सके। नगर मछुआरा संघ के अध्यक्ष गजानंद ढीमर ने बताया कि इस तालाब में स्थानीय मछुआरा समाज द्वारा मछली पालन का कार्य भी किया जाता है, जो उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। तालाब की सतह पर जलकुंभी की मोटी परत होने के कारण सघन जलकुंभी के चलते मछुआरे तालाब में न तो जाल डाल पा रहे हैं और न ही किसी अन्य पारंपरिक माध्यम से मछली पकड़ पा रहे हैं। रोजी-रोटी पर आए इस संकट को लेकर मछुआरा समुदाय में नगर पालिका के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
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गुडरूपारा तालाब 5 साल से जलकुंभी से पटा निस्तारी के लिए पांच हजार आबादी परेशान














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