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आलीराजपुर जिले के जोबट क्षेत्र में आंगनवाड़ी व्यवस्थाओं में अनियमितता का मामला सामने आया है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाला नियमित नाश्ता और पोषण आहार पिछले एक महीने से कई केंद्रों पर वितरित नहीं किया जा रहा था। प्रशासनिक जांच में यह खुलासा हुआ कि रिकॉर्ड में वितरण जारी था, लेकिन मौके पर बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा था। कलेक्टर नीतू माथुर के निर्देश पर एसडीएम वीरेंद्र सिंह बघेल ने जोबट क्षेत्र की आंगनवाड़ियों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई केंद्रों पर पोषण आहार वितरण के रिकॉर्ड तो अपडेट पाए गए, लेकिन मौके पर न तो भोजन उपलब्ध था और न ही रसोई संचालन की कोई व्यवस्था दिखी। जांच में कुल 93 स्वयं सहायता समूहों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इन समूहों पर बच्चों को मिलने वाला नाश्ता और पोषण आहार नियमित रूप से वितरित न करने का आरोप है। प्रशासन ने सभी 93 समूह संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी निरीक्षण के दौरान ग्राम डेकाकुंड में चार आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह बंद पाए गए। इन केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति नहीं थी और भोजन वितरण व्यवस्था भी ठप मिली। इस मामले में दो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, दो सहायिका और संबंधित सुपरवाइजर पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के पोषण से जुड़ी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे प्रकरण ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। एक महीने तक बच्चों को पोषण आहार न मिलने और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी न होने का विषय अब जांच का केंद्र बिंदु बन गया है। जोबट की आंगनवाड़ियों से सामने आया यह मामला अब जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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आंगनवाड़ियों में 'पोषण घोटाला' उजागर:93 समूहों पर बच्चों का राशन हड़पने का आरोप, जांच जारी















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