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उज्जैन में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के छात्रों ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। छात्र कोठी रोड स्थित शासकीय संभागीय एवं पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास की बदहाल स्थिति को लेकर आक्रोशित थे। छात्रों का आरोप है कि करीब 44 साल पुराना यह छात्रावास भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे यहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा खतरे में है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन से 1000 सीट क्षमता वाले एक नए और आधुनिक छात्रावास के निर्माण की मांग की। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। जानकारी के अनुसार, इस छात्रावास का निर्माण वर्ष 1980 में किया गया था। उस समय उज्जैन संभाग की आबादी और छात्र संख्या को देखते हुए इसमें 100 सीटों की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, समय के साथ छात्र संख्या में लगातार वृद्धि हुई, लेकिन छात्रावास की क्षमता और संसाधनों में कोई विस्तार नहीं किया गया। छात्रों ने बताया कि भवन की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं और इसके कई हिस्से कमजोर हो गए हैं। इस जर्जर स्थिति के कारण छात्रों को हमेशा किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। छात्र नेता अजय सिसोदिया ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 1980 में उज्जैन संभाग की आबादी लगभग 5 से 7 लाख थी, जो अब बढ़कर 17 से 18 लाख तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद छात्रावास में आज भी केवल 100 सीटें ही उपलब्ध हैं, जो वर्तमान आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त हैं। इस मामले पर उज्जैन के एसडीएम एल एन गर्ग ने बताया कि मैंने कलेक्टर से बात की है। कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि वर्तमान परिसर की जमीन का परीक्षण कराया जाएगा। यदि वहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध होती है, तो उसी स्थान पर नए छात्रावास निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, यह निर्णय भूमि की उपलब्धता की जांच के बाद ही लिया जाएगा।
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उज्जैन में जर्जर छात्रावास पर छात्रों का प्रदर्शन:1000 सीट वाले नए भवन की मांग; दीवारों में दरारें, हादसे का डर
















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