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भास्कर न्यूज | सरायकेला जिला कृषि विभाग द्वारा बुधवार को स्थानीय टाउन हॉल में जिला स्तरीय खरीफ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा एवं उप विकास आयुक्त रीना हांसदा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी रोशन नीलकमल, आत्मा के सहायक परियोजना निदेशक विजय कुमार सिंह, सहकारिता पदाधिकारी जगमनी टोपनो, भूमि संरक्षण पदाधिकारी रियाज अंसारी, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी राजकुमार, गव्य विकास पदाधिकारी चंदन गोविंद देव एवं पशुपालन पदाधिकारी रामचंद्र गोगले समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि हमारे पूर्वजों के पास पर्याप्त कृषि भूमि रही है और आज तक किसान पारंपरिक तरीके से खेती करते आ रहे हैं, लेकिन वर्तमान समय में किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को समय पर खाद, बीज एवं सिंचाई जैसी सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य की खेती वर्षा पर आधारित है, इसलिए किसानों को नई तकनीकी जानकारी सीखकर खेती को अधिक लाभकारी बनाना होगा। उन्होंने किसानों से खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों की खेती पर भी जोर देने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाकर फसल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है तथा किसानों की आय को दोगुना कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। मौके पर उप विकास आयुक्त रीना हसदा ने भी किसानों को संबोधित करते हुए उन्हें नई कृषि तकनीकों से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। किसानों को मिला सोलर पंप व केसीसी का लाभ : जिला स्तरीय खरीफ कार्यशाला के दौरान कृषि विभाग द्वारा किसान समृद्धि योजना के अंतर्गत दो किसानों को टोली बेस्ड सोलर पंप सेट प्रदान किया गया। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा में सहूलियत मिलेगी तथा खेती को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। वहीं जिले के सात किसानों के बीच कुल 6 लाख 50 हजार रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड भी वितरित किया गया। जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम ने किसानों को अपने हाथों से लाभान्वित करते हुए कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को खेती के लिए आसान ऋण सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे वे समय पर बीज, खाद एवं अन्य कृषि संसाधनों की खरीद कर सकेंगे।
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खेती में नई तकनीक को अपनाकर किसान बनें आत्मनिर्भर : सोनाराम बोदरा











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