![]()
ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को राजधानी रांची की लगभग सभी निजी दवा दुकानें बंद रहीं। झारखंड केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन और ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट, मुंबई के आह्वान पर हुए एक दिवसीय बंद का सबसे अधिक असर रिम्स और सदर अस
.
रिम्स, सदर अस्पताल से लेकर मेन रोड, लालपुर, बरियातू, कांटाटोली, हरमू और अन्य प्रमुख इलाकों की दवा दुकानें तो दिनभर बंद रही हीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी दुकानें पूरी तरह शटर डाउन रही। अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे हजारों मरीज और उनके परिजन डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद दवा खरीदने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकते रहे, लेकिन हर जगह शटर बंद मिले।
दवा बंदी के बीच रिम्स और सदर अस्पताल परिसर में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी ही मरीजों के लिए सहारा बने रहे। हालांकि यहां भी मरीजों को पूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं। स्थिति यह रही कि मरीज और उनके परिजन लंबी कतार में खड़े होकर दवा की पर्ची दुकानदार को देते रहे, लेकिन अधिकांश मामलों में केवल एक-दो दवाएं ही मिल सकीं।
कई जरूरी दवाएं स्टॉक में नहीं थीं। कई मरीज बिना दवा लिए ही वापस लौट गए, जबकि गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक दिक्कत हुई। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि फर्जी प्रिस्क्रिप्शन अपलोड कर कई लोग प्रतिबंधित दवाएं तक मंगा रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
बालूमाथ (लातेहार) से इलाज कराने रिम्स पहुंची राशिना बीबी के परिजनों को दवा बंदी के कारण भारी परेशानी उठानी पड़ी। परिजन दवा की पर्ची लेकर रिम्स परिसर व आसपास की कई दुकानों का चक्कर लगाते रहे, लेकिन हर जगह शटर बंद मिला। शाम करीब चार बजे तक भी उन्हें जरूरी दवाएं नहीं मिल सकीं। रांची के जोड़ा तालाब निवासी मोशर्रत जहां इलाज कराने सदर अस्पताल पहुंची थीं। डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद वह अमृत फार्मेसी में दवा लेने पहुंचीं।
वहां पहले से लंबी कतार लगी थी। करीब 40 मिनट तक लाइन में खड़े रहने के बाद जब उनकी बारी आई, तो लिखी गई दो जरूरी टैबलेट उपलब्ध नहीं हो सकीं। रिम्स ओपीडी में हर दिन दो से ढ़ाई हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बुधवार को भी सुबह से बड़ी संख्या में मरीज विभिन्न विभागों में जांच और इलाज के लिए पहुंचे थे। डॉक्टरों से परामर्श और जांच के बाद जैसे ही मरीज बाहर निकले, उन्हें बंद दवा दुकानों का सामना करना पड़ा।
कई मरीजों ने बताया कि उन्हें यह जानकारी ही नहीं थी कि दवा दुकानें बंद रहेंगी। दवा नहीं मिलने से परेशानी बढ़ गई। दवा दुकानदारों के बंद का आर्थिक असर भी बड़ा रहा। पूरे झारखंड से गंभीर मरीज इलाज के लिए रांची पहुंचते हैं, जिससे राज्य के कुल दवा कारोबार का करीब 50% हिस्सा राजधानी से ही होता है। केवल रांची में ही एक दिन में 5 करोड़ से अधिक का दवा कारोबार प्रभावित हुआ। कुछ दुकानों के शटर आधे खुले हुए थे। कहीं-कहीं बिक्री होती रही।











Leave a Reply