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रांची झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे में बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है। राजधानी के एक होटल में गुरुवार से शुरू हुई दो दिवसीय वीसी कॉन्फ्रेंस में सरकार ने विश्वविद्यालयों के सामने नया यूनिवर्सिटी मॉडल रखा। इसमें झारखंड विवि अधिनियम-2026, क्लस्टर सिस्टम, केंद्रीकृत ऑनलाइन एडमिशन, डिजिटल मॉनिटरिंग, विवि सेवा आयोग और शैक्षणिक-गैर शैक्षणिक पदों के पुनर्गठन को केंद्र में रखा गया। कांफ्रेंस में साफ संकेत दिया गया कि सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित और एकरूपता के ढांचे में बदलना चाहती है। हालांकि क्लस्टर सिस्टम को लेकर उठ रहे विरोध और सवालों के बीच सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट में बदलाव की बात भी सामने आई। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन गवर्नर संतोष कुमार गंगवार ने किया। अवर सचिव नीति मदन कुलकर्णी, विभागीय प्रधान सचिव राहुल पुरवार, आरयू वीसी प्रो. सरोज शर्मा, डीएसपीएमयू वीसी प्रो. राजीव मनोहर समेत अन्य विवि के वीसी, डीएसडब्ल्यू, रजिस्ट्रार, प्राचार्य और अधिकारी शामिल हुए। क्लस्टर सिस्टम को लेकर भी मंथन कॉन्फ्रेंस में क्लस्टर सिस्टम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना रहा। कई कुलपतियों और शिक्षाविदों ने इसके व्यावहारिक पक्ष, कॉलेजों की स्वतंत्रता और विषयों के पुनर्गठन को लेकर सवाल उठाए। इसके बावजूद अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार ने क्लस्टर मॉडल को बेहतर बताया। विश्वविद्यालयों से मिले सुझावों के आधार मुख्य विषय के अलावा छात्रों की संख्या वाले विषय को भी शामिल किया जाएगा। सम्मेलन में यह भी बताया गया कि एडमिशन प्रक्रिया पूरी तरह चांसलर पोर्टल से संचालित की जाएगी। इसके लिए विषयवार मैपिंग, सीट निर्धारण और कॉलेजों की क्षमता का डिजिटल इंटीग्रेशन किया जाएगा। इससे एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। भविष्य में परीक्षा, रिजल्ट और छात्रवृत्ति से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी इसी डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। विश्वविद्यालय सेवा आयोग की संरचना को लेकर भी कई सवाल उठे। प्रतिभागियों ने पूछा कि आयोग में शिक्षकों की भागीदारी सीमित रखी गई है। वहीं रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स को ज्यादा महत्व दिया गया है। इस पर अधिकारियों ने कहा कि कई राष्ट्रीय चयन संस्थानों में इसी तरह की संरचना होती है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि आयोग में शिक्षकों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इस दौरान यह भी बताया गया कि चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।
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टेक्नोलॉजी आधारित और एकरूपता के ढांचे से बदलेगी शिक्षा व्यवस्था













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