पंचायत सचिव रोजगार सहायक के तबादले पर बोले सीएस:'ये एमपी, यूपी कैडर के अधिकारी नहीं जो जिले से बाहर जाएं, जिला स्तर पर होगा तबादला'




मोहन कैबिनेट की बैठक में शिक्षकों और पंचायत सचिवों व रोजगार सहायकों के तबादलों को लेकर मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से कहा कि इसके लिए कार्यकर्ता दबाव बनाते हैं लेकिन तबादले नहीं कर पाने से विरोध झेलना पड़ता है। पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों के तबादले जिले के बाहर नहीं हो पाने को लेकर तो मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के सवाल पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने यह तक कह दिया कि ये यूपी और एमपी कैडर के अधिकारी थोड़े ही हैं जो इन्हें जिले से बाहर किया जाए। अभी जो पॉलिसी बनी है उसमें वे जिले के भीतर ही रह सकते हैं और सीईओ जिला पंचायत ऐसे मामलों में कार्यवाही करते हैं। यह मामला मंत्रालय में गुरुवार को हुई बैठक के दौरान तब आया जब सभी एजेंडों पर चर्चा के बाद प्रदेश की 2026 की तबादला नीति पर अलग से चर्चा शुरू हुई। बताया जाता है कि सबसे पहले स्वैच्छिक तबादले को लेकर मुद्दा उठा तो चीफ सेक्रेट्री जैन ने कहा कि पति पत्नी और गंभीर बीमारी वाले तबादलों को स्वैच्छिक तबादलों से बाहर रखा गया है। ऐसे मामलों में स्वैच्छिक तबादले का प्रतिशत नहीं जोड़ा जाएगा और आवश्यकता के आधार पर तबादले किए जा सकेंगे। जैन ने यह भी साफ किया कि गंभीर बीमारी के मामले में सिर्फ संबंधित कर्मचारी की गंभीर बीमारी को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रद्युम्न सिंह बोले- कार्यकर्ता नाराज होते हैं बैठक के दौरान ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग के तबादलों को लेकर दिक्कत होती है। कार्यकर्ता नाराज होते हैं कि उनके बताए तबादले नहीं हो पाते हैं। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि विभाग की अलग पॉलिसी जारी की जाएगी और पिछले साल की तरह ऐसी स्थिति नहीं बनने देंगे। मंत्रियों की ओर से कार्यकर्ताओं की सिफारिश पर की जाने वाली अनुशंसाओं को भी तबादले में शामिल किया जाएगा। इस बार की नीति में इसका ध्यान रखा जाएगा। गोविंद सिंह ने उठाया था मुद्दा खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों के तबादले का मामला उठाते हुए कहा कि इनका भी स्थानांतरण होना चाहिए लेकिन नीति में इसका प्रावधान नहीं है। कार्यकर्ता इसको लेकर शिकायत करते हैं। इस पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि रोजगार सहायक और पंचायत सचिव का तबादला एमपी कैडर या यूपी कैडर की तर्ज पर तो किया नहीं जा सकता। जब इनके लिए जिला स्तर पर तबादले का प्रावधान है तो जिला पंचायत सीईओ अपने स्तर पर तबादले कर देते हैं और जिला में ही ये पदस्थ रहते हैं। इस पर मंत्रियों ने जिला स्तर पर बदलाव की बात कही। इस पर मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद आने वाले समय में इस मामले में निर्णय लेने को कहा गया।



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