बाबूलाल प्रेमसंस ग्रुप व मारवाड़ी युवा मंच ने चलंत प्याऊ का शुभारंभ किया



रांची | भीषण गर्मी के बीच रांची में बाबूलाल प्रेमसंस ग्रुप और मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा के सहयोग से जनसेवा के तहत दो निःशुल्क चलंत प्याऊ का शुभारंभ किया गया। यह चलंत प्याऊ बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में घूम-घूमकर निशुल्क ठंडा और स्वच्छ पेयजल वितरित करेंगे, ताकि राहगीरों को राहत मिल सके। बाबूलाल प्रेमसंस ग्रुप के एक पदाधिकारी ने कहा कि बढ़ती गर्मी में पानी सबसे बड़ी जरूरत है और यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी।यह पहल समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने का प्रेरणादायक प्रयास है। कार्यक्रम में दोनों संस्थाओं के वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। रांची | अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस पर रांची के इस्टर्न कॉलेज ऑफ नर्सिंग एंड हेल्थ स्टडीज में फोर्थ बैच जीएनएम छात्राओं के लिए लैंप लाइटिंग और शपथ ग्रहण समारोह हुआ। छात्राओं ने फ्लोरेंस नाइटिंगेल के आदर्शों पर चलते हुए मानव सेवा का संकल्प लिया। कार्यक्रम में जेएनआरसी रजिस्ट्रार प्रतिमा लकड़ा मुख्य अतिथि रहीं, जबकि डॉ. मणि मुक्ता, डॉ. अनिंद्य अनुराधा और डॉ. अशोक कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। समारोह में जलते दीप को प्रतीकात्मक रूप से एक-दूसरे को सौंपकर ज्ञान, सेवा और करुणा की निरंतरता का संदेश दिया गया। कॉलेज निदेशक निशांत कुमार ने कहा कि नर्सिंग सेवा और समर्पण का नाम है तथा अनुशासन, सहानुभूति और तकनीकी दक्षता इस क्षेत्र की पहचान हैं। रांची | वट सावित्री पूजा को ध्यान में रखते हुए बाबूलाल प्रेमकुमार ने रांची और चास के अपने स्टोर में पूजा के अनुरूप साड़ियों की खास रेंज उपलब्ध कराई है। स्टोर में लाल, पीली और नारंगी रंगों के साथ पूजा में उपयोग होने वाली साड़ियों के कई विकल्प रखे गए हैं, जिन्हें ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। स्टोर प्रबंधन के अनुसार, साड़ियों के साथ सलवार सूट, कुर्ती, मेंसवियर और किड्सवियर की नई श्रृंखला भी खरीदारों को आकर्षित कर रही है। हैंडलूम, होम फर्निशिंग और कॉस्मेटिक्स के साथ सफारी के बैकपैक और लगेज भी पसंद किए जा रहे हैं। लगन के सीजन में खरीदारी को आसान बनाने के लिए 1.5 लाख में पूरी शादी की खरीद का विकल्प भी दिया गया है, ताकि सगाई से विदाई तक की जरूरतें एक ही छत के नीचे पूरी हो सकें। रांची| पारस एचईसी अस्पताल, रांची के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में एक नवजात का अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक रोग रेसेसिव डिस्ट्रॉफिक एपिडर्मोलाइसिस बुलोसा (आरडीईबी) के साथ सफल उपचार किया गया। इस स्थिति में जन्म से त्वचा बहुत नाजुक रहती है और हल्के स्पर्श से भी छाले व घाव बन जाते हैं। बच्चे के मुंह में घाव होने के कारण दूध पीने में भी परेशानी थी। चिकित्सकों ने जन्म के तुरंत बाद आशंका पहचान कर ‘जीरो-ट्रॉमा’ देखभाल शुरू की, जिसमें संभालने की विशेष तकनीक, ड्रेसिंग, दर्द नियंत्रण, पोषण प्रबंधन और संक्रमण से बचाव पर सतत निगरानी रखी गई। बाद में विशेष जांच में रोग की पुष्टि हुई। इलाज के बाद शिशु की स्थिति स्थिर हुई और विस्तृत देखभाल योजना के साथ छुट्टी दी गई। डॉ. निशांत पाठक के अनुसार समय पर पहचान और परिवार को सही परामर्श निर्णायक होता है। फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने उन्नत एनआईसीयू व जांच सुविधाओं का उल्लेख किया।



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